Sunday, 31 December 2023

त्रिकोणासन करने की प्रायोगिक विधि और इससे लाभ

December 31, 2023 0 Comments

त्रिकोणासन - त्रिकोण की मुद्रा में शरीर को व्यवस्थित करने के कारण इस आसन को त्रिकोणासन कहा जाता है।

त्रिकोणासन करने की प्रायोगिक विधि - विश्राम की अवस्था में खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच हाथ को ऊपर आकाश की ओर उठाएं। ऊपर वाले हाथ से बाएं पैर की एड़ी को स्पष्ट करें।
क्रिया करने से पहले हाथ ऊपर उठाकर गाड़ी सांस लें और पैर की एड़ी को स्पर्श करें

त्रिकोणासन में ध्यान - त्रिकोणासन ध्यान का आसन नहीं है इसका संबंध शरीर के व्यायाम से है।

त्रिकोणासन करने से लाभ - इस आसन में बड़ी आत तिल्ली जिगर कमर मेरुदंड पीठ बाह टांग आदि पर प्रभाव पड़ता है। पेशियों एवं स्नायुओ को बल मिलता है। कमर सुडौल होती है।


त्रिकोणासन करने से पहले सावधानियां - (1) उत्तर की ओर सिर करके त्रिकोणासन ना लगाएं। (2) आसन लगाते समय अपनी टांगों को ताने रखें, ये दो खास सावधानियां इस असं में रखने की जरूरत है। 

Saturday, 30 December 2023

योग करने से पहले रखें इन बातों का ख्याल, नहीं तो उठानी पड़ सकती है भारी नुकसान।

December 30, 2023 0 Comments

 

योग वह कला है जिसको करने से आप अपने मन को  उस परम् शक्ति एवं परम् ज्ञान से जोड़ सकते है । जिसको आपको अनुभूति होती है। योग मानव भावनाओं को संतुलित करने और ताल में बनाने का एक साधन है । योग व्यक्ति के शरीर में रचनात्मक दृष्टि से काम करता है। जैसे मानसिक, भौतिकक, आत्मिक और आध्यात्मिक। योग का अर्थ होता है "जोड़ना" यानी "जोड़". योग हमारे व्यक्तिगत चेतना को आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ने का कार्य करता है।

asana
Asana



योग करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है जिससे योगासन का अधिक से अधिक लाभ मिल सके और अज्ञानता के कारण होने वाली भूलो से किसी भी दुष्परिणाम से बचा जा सके।


1) योगा करने से पहले या बाद में एकदम कुछ भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि योगा करने से फायदे कम, नुकसान ज्यादा उठानी पड़ सकती है। जो भी आप खाएं डेढ़-दो घंटे बाद ही खाएं। केवल एकमात्र आसन वज्रासन ही भोजन के बाद किया जा सकता है, इसके अलावा कोई भी आसन या योग भोजन के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि आपको बहुत ही मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। खाली पेट योगासन करना सर्वोत्तम माना गया है तो जब भी आप योगासन करें खाली पेट ही करें।

2) चाय या दूध पीने के तुरंत बाद भी कोई भी योगासन ना करें क्योंकि इससे आपके शरीर पर दुष्परिणाम हो सकता है।

3) योगासन स्नान करने के तुरंत बाद नहीं करनी चाहिए  क्योंकि स्नान के बाद शरीर में ब्लड प्रेशर ज्यादा ही उतेजित रहता जिससे आपके मस्तिष्क पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है।

4) स्त्रियों को गर्भावस्था तथा रजस्वला होने के समय भी आसनों को कभी नहीं करना चाहिए, इसका विपरीत परिणाम आपको उठानी पड़ सकती है।

5) जब आप अत्यंत क्रोध और अत्यंत सुख में हो तब भी योगासन  ना करे, ऐसे समय में आसन करने से लाभ के वजह हानि ज्यादा होगी। आसन करते समय मन में बुरे विचार एवं मानसिक तनाव को कभी ना लाए और इससे बचने की कोशश करें।

6) योग कभी भी जल्दी बाजी में ना करें जब आपके पास पूर्ण रूप से योगासन करने के लिए पर्याप्त समय हो तभी योगासन करें। योगासन को धीरे-धीरे विधि पूर्वक पूरा समय देकर ही संपन्न करें क्योंकि इससे आपको ज्यादा लाभ प्राप्त होता है नहीं तो आपको जल्दी बाजी में लाभ से ज्यादा हानि होगी।

7) योगासन करते समय हंसे या बोले नहीं। आसन करते समय हसने या बोलने से मसल पुल का खतरा होता है।

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Friday, 29 December 2023

सिद्धासन करने की विधि और इसके लाभ | Siddhasana - Benefits and Steps of Siddhasana

December 29, 2023 0 Comments


यह आसन सिद्धों का आसन है । इस आसन में लंबे समय तक बैठकर सिद्धि प्राप्त की जाती है।


सिद्धासन करने से पहले सावधानियां - सिद्धासन उत्तर दिशा की ओर मुंह करके इस आसन को कभी ना करें।इस आसन को शुरुआत में 2 मिनट तक ही इसमें ध्यान लगाएं,  बाद में इसे बढ़ाते जाएं,  15 मिनट से अधिक इस आसन में बैठने के लिए त्राटक बिंदु को केंद्रित करने का कुशल अभ्यास आवश्यक है । 

सामान्य लोगों के लिए 15 मिनट से अधिक ''ध्यान" लगाना उचित नहीं होगा। मस्तिष्क की नसें विकृत हो सकती है।
इस आसन के अभ्यास के दिनों में गर्म या उत्तेजक पदार्थों का आहार पूर्ण रूप से वर्जित है और साथ-साथ आप नमक का भी प्रयोग अपने खाने में कम करें।

सिद्धासन करने का विधि  - किसी भी आसन करने से पहले आप किसी दरिया चटाई का इस्तेमाल करें। बिना चटाई या दरी के कोई भी आसन ना करें। भूमि पर बिछी दरी या चटाई पर दोनों टांगो को सामने की ओर फैला कर बैठ जाएं । अब आप अपनी बाँयी टांग को मोड़कर एड़ी को गुदा एवं अंडकोष (testicle)के बीच कसकर सटा लीजिए। अब तलवे एवं पंजे को दाएं जांघ से चिपका ले।

अब आप दायीं टांग को घुटने से मोड़कर एड़ी को ज्ञानेंद्रियां से ऊपर इस प्रकार कसकर सताएँ कि ज्ञानेंद्रियां पर दबाव ना पड़े।  इसका पंजा बॉयी टांग की पिंडली तथा जाँघ से मिला हुआ रहे । दोनों टखनों की हड्डियां एक- दूसरे पर हो । कमर, रीढ़, गर्दन आदि सीधी रखें। दोनों हाथों को नाभि के नीचे ब्रह्मांजलि की दिशा में रखें। और अपने सांसो को सामान्य रखें। यानी अपने सांसो को ना ही जोर-जोर से ले नहीं धीरे-धीरे, सांस हमेशा अपनी सामान्य गति में होना चाहिए।


सिद्धासन में ध्यान -  आंखों से नाक की लौ की ओर देखें । आपको ललाट के मध्य में दबाव का अनुभव पड़ेगा । इस दबाव को बनाए रखें, ध्यान एकांग्रचित कीजिए | इससे आपको स्मरण शक्ति का ज्यादा से ज्यादा विकास होगा। अगर आप इस आसन को लगातार करते हैं,  तो आपको स्मरण शक्ति का विकास होगा और आपको हमेशा के लिए आपको भूलने का बीमारी खत्म हो जाएगा।


सिद्धासन का लाभ - इस आसन से आपका हृदय की बीमारी ठीक होता है। इसके साथ साथ अगर आप का श्वास रोग से पीड़ित हैं तो यह आसन स्वास रोग को भी ठीक करता है। अगर आप किसी योन रोग से पीड़ित हैं तो यह आसन लगातार करने से आपके यौन रोग को भी ठीक करता है। अगर आप किसी पाचन-क्रिया से संबंधित किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो इस आसन को लगातार करने से आपके पाचन-क्रिया संबंधी सारे रोगों को ठीक करता है।

इसका वास्तविक लाभ मानसिक है। इसमें ध्यान लगाने से मानसिक शांति मिलती है । दृष्टि तीक्ष्ण होती है । त्राटक बिंदु में प्रकाश भरता है।  कहा जाता है कि भगवान शंकर ने इसी मुद्रा में ध्यान लगाकर अपने तीसरे नेत्र को महाशक्तिमान बनाया था। इसीलिए यह आसन चमत्कारिक शक्तियों को प्रदान करने वाला है त्राटक बिंदु के खुलने पर दृष्टि का भाव बाहरी संसार पर प्रभाव डालने लगता है। 

Thursday, 28 December 2023

महिलाओं को कहां शर्म नहीं करनी चाहिए । Where should women not be shy?

December 28, 2023 0 Comments

 

Women suffer
Women suffer

आज उन महिलाओं के बारे में बात करेंगे जो अपने शारीरिक कठिनाइयो को खुल के अपने डॉक्टर को नहीं बताती। जिसके कारण उनको आगे चलकर भारी नुकसान उठाना पड़ता है।


ज्यादातर ये महिलाएं ग्रामीण जैसे क्षेत्रो से आती है, लेकिन बात सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का नहीं है। कुछ ऐसे भी महिलाएं है, जो अपना शारीरिक बीमारी को डॉक्टर से बताने में शर्म करती है। इन महिलाओं को अपने शारीरिक बीमारी को अपने डॉक्टर से बताने में हिचकिचाहट और शर्म महसूस करती है जिसके कारण डॉक्टर बीमारी को सही से नहीं पकड़ पाते और सही इलाज़ नहीं मिल पाने के कारण बहुत सी ऐसी औरतों का सेहत हमेशा खराब रहता है। आगे चलकर उनको ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। कभी कभी तो हालात इतनी खराब हो जाती है कि उन महिलाओं का मौत भी हो जाती है।


                             "महिलाएं जब अपने गायनोकोलॉजिस्ट के पास जाती हैं। तो वह सारी परेशानियां बताने में शर्म करती हैं। वह अपने तकलीफ को नार्मल समझती हैं। इस कारण वो, अपने बीमारी का शिकार बन जाती है आपको बता दें कि इस तरह महिलाओं को नहीं करना चाहिए। महिला अपने तकलीफ को नजरअंदाज न करें। वह अपने चिकित्सक के पास जाए तो अपनी सारी परेशानी खुलकर बताए" ।

आज उन बातों के बारे में बात करेंगे जो महिलाएं डॉक्टर से बताने में शर्म करती है।

1) अनियमित पीरियड्स:-  आपकी पीरियड्स के दौरान हमेशा आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जैसे समय से आगे पीछे पीरियड्स आना, कम उम्र में पीरियड्स आना, पीरियड के दौरान ज्यादा दर्द होना। अगर ये सब लक्षण दिखे। तो तुरंत अपने गायनोकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। और अपनी सारी बातें खुल कर बताएं। नहीं तो आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

2) बॉडी के पार्ट से बदबू आना:-अगर आपके बॉडी के कोई भी पार्ट से बदबू आती है तो आपको अलर्ट हो जाने की जरूरत है। क्योंकि बदबू  इनफेक्शन के कारण होते है। कभी भी इसे हल्के में ना लें, तुरंत अपने डॉक्टर से मिले।


3) संबंध के दौरान दर्द होना:- ज्यादातर महिला को संबंध के दौरान दर्द होता है। और महिला इस तकलीफ को नजरअंदाज करती हैं। वे अपने बेडरूम का बात डॉक्टर से बताने में झिझकती और शर्माती है। औरतें जब अपनी तकलीफें डॉक्टर से नहीं बताएंगी, तो उनका इलाज सही तरीके से नहीं हो पाएगा। इससे वह अपने बीमारी का शिकार बनती जाएंगी।


4) संबंध के बाद ब्लड आना: संबंध के बाद अगर महिला को पहली बार ब्लड आता है, तो यह सामान्य है । यदि महिला को संबंध के बाद अगर बार - बार ब्लड आते हैं, तो यह चिंता का विषय है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी परेशानी को जल्दी बताकर अपना इलाज कराना चाहिए।

Wednesday, 27 December 2023

योगा करें स्वस्थ रहें

December 27, 2023 0 Comments
योगाभ्यास में आसन शरीर के विभिन्न मुद्राओं में बनाई गई विशिष्ट मुद्रा को कहते हैं । योग साधना में आसनों का अभ्यास मांसपेशियों रक्त इंद्रियों रोमकूपों आदि के विकारों को दूर करने एवं शरीर क्रिया का स्वास्थ्य रहना एवं पेशियों का लचीला होना ध्यान की एकाग्रता मैं अत्यंत सहायक होता है।
स्वाभाविक है कि यदि इसे व्यायाम के रूप में अपनाया जाए तो सभी प्रकार के रोगों को दूर करने में सहायक होता है।


लेकिन यह सदा स्मरण रखें की 'योग साधना' का उद्देश्य उस चेतना की शुद्धि एवं शक्ति का विकास करना है जो शरीर ही नहीं मन का भी संचालक है। सभी प्रकार की बीमारियों की जड़ मन की विकृति है। हमारे मन में यदि निराशा है, तो हमारा रक्तचाप गिर जाएगा, पेट में कब्ज हो जाएगी, अपच की शिकायत हो जाएगी, गैस बनेगी,  सर के बाल झड़ेंगे, या सफेद होने लगेंगे,  चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाएंगी, आंखों के नीचे काली छाया उभर जाएगी।
इसी प्रकार क्रोध में हमारा रक्तचाप बढ़ जाता है। नेत्र के तंतु प्रभावित होते हैं। मस्तिष्क की नारियां फूलने-पिचकने लगती है। इससे इनकी स्वभाविक स्थिति में परिवर्तन हो जाता है । क्रोध से रक्त में विषाक्त तत्व उत्पन्न होते हैं । इससे रक्त दूषित होता है अनेक प्रकार की बीमारियां रक्त के दूषित होने से उसे अपनी गिरफ्त में ले लेती है।


यदि मन की शुद्धि नहीं हुई, तो शरीर में विषाक्त तत्व बनते रहेंगे। आप उसे व्यायाम के द्वारा ठेल कर बाहर निकालते रहेंगे। व्यर्थ ही जीवन भर श्रम करते रहना होगा । इसमें आपको मानसिक शांति, उत्साह, उल्लास, आदि केवल आसन के अभ्यास से नहीं मिल पाएगा । मस्तिष्क का क्षेत्र 'ध्यान' का है। ध्यान लगाकर ही आप शारीरिक एवं मानसिक स्वस्थता को प्राप्त कर सकते हैं। सांसारिक मामलों की सफलता में भी यह आपको सहायता देगा । 

Tuesday, 26 December 2023

गोरक्षासन करने की विधि और इससे लाभ। Gorakshasana, Gorakshasana steps and benefits

December 26, 2023 0 Comments
गोरक्षासन - गोरक्षासन को गोरखासन भी कहते हैं। महागुरु गोरक्षनाथ (गोरखनाथ) इसी आसन में साधना करते थे।

गोरक्षासन करने की प्रायोगिक विधि - कंबल या दरी बिछाकर नीचे बैठ जाइए, दोनों टांगों को घुटनों से मोड़कर दोनों पैरों के तलवों को एड़ियों से पंजो तक आपस में चिपका लीजिए। दोनों एड़ियों को धीरे-धीरे मूलाधार से सटा लीजिए। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर पैरों के पंजों को पकड़िए। इसमें हाथों के अंगूठे दोनों पैरों के अंगूठे के ऊपर होने चाहिए। सांस को खींचिए और कमर को सीधी रखकर घुटनों को भूमि से सटाइए। जितनी देर सांस रोक सके, रोकें। फिर सांस छोड़कर धीरे-धीरे आसन खोलिए।

आरंभ में घुटनों को भूमि से सटाने के लिए दोनों घुटनों को हाथों से दबाव दिया जाता है और पंजों को पकड़ने की मुद्रा बाद में की जाती है। अभ्यास होने पर घुटने आसानी से भूमि से लग जाते हैं।

गोरक्षासन में ध्यान - यह शक्ति सिद्धि का आसन है। इस आसन में ध्यान लगाने से सम्मोहन-क्षमता, काम-क्षमता एवं शरीर की गुप्त अलौकिक शक्तियों का विकास होता है।

गोरक्षासन से लाभ - गोरक्षासन के अभ्यास से शुक्र ग्रंथियों का व्यायाम होता है। इससे पुरुषों के शुक्राणुओं की क्षमता बढ़ती है। वीर्य वृद्धि एवं वीर्य के गाढ़ेपन में लाभ मिलता है। यह आसन स्वप्नदोष एवं शीघ्रपतन के दोष से मुक्त करता है। मूत्र संबंधी दोष एवं आंत और पेट से संबंधित रोग (बदहजमी, कब्ज, गैस आदि) दूर होते हैं। कंधे पुष्ट होते हैं।बाजुओं की आकृति और बनावट देखते बनती है। पैरों की नसें और पेशियां मजबूत एवं लचीली होती हैं।

महिलाओं को उपर्युक्त शारीरिक लाभ तो होता ही है, मासिक धर्म, रज एवं गर्भाशय के दोष भी दूर होते हैं। जंघाओं एव वक्षों की सुडौलता बनती है। बाजू मजबूत होते है। कमर दर्द और ल्यूकोरिया में भी इससे लाभ होता है।

गोरक्षासन करने से पहले सावधानियां - उत्तर दिशा की ओर मुंह करके या आसन ना लगाएं। घुटनों को भूमि से सटाने में जोर न लगाएं। धीरे-धीरे अभ्यास करने से इस आसन पर काबू पाया जा सकता है।

 

Monday, 25 December 2023

क्या आप अपना कल सुरक्षित कर रहे है ? | Are you securing your tomorrow?

December 25, 2023 0 Comments

 

Plants in hand
Plants in hand
एक दिन की बात है। एक बकरी को शिकारी कुत्ते ने घास चाड़ते देख लिया। शिकारी कुत्ते ने धीरे-धीरे उस बकरी  के तरफ बढ़ने लगा, जैसे ही उस बकरी की नज़र उस शिकारी कुत्ते पर पड़ी। बकरी समझ गई कि, आज ये शिकारी कुत्ता मुझे नहीं छोड़ेगा और उस कुत्ते को देखते ही बकरी तुरंत भागने लगी ।


वह शिकारी कुत्ता भी तेजी से दौड़ने लगा, उस बकरी को खाने के लिए। अब बकरी आगे-आगे और शिकारी कुत्ता पीछे-पीछे भागने लगे। बकरी अपना जान बचाने के लिए भागते भागते एक झाड़ी में घुस गई और कुत्ता आगे निकल गया।


अब बकरी निश्चिंतापूर्वक उस झाड़ी की हरी हरी पत्ती खाना शुरू कर दिया और जमीन से लेकर अपने गर्दन पहुंचे तक उस दूरी तक पत्ते खा लिए। अब झाड़ी में पत्ती नहीं रही , बकरी साफ-साफ देखी जा सकती थी। अब बकरी का छिपने का सहारा ख़त्म हो गया और बकरी का छिपने का सहारा ख़त्म हो जाने के कारण कुत्ते ने उस बकरी को देख लिया और उसे मार डाला।


"दोस्तो इस कहानी का तात्पर्य यह है कि सहारा देने वालो को कभी भी नष्ट ना करे, क्योंकि जो सहारा देने वालों को नष्ट करता है उसकी भी बकरी की तरह ही दुर्गति होती है यानी परिणाम बहुत ही भयंकर होता है"।

        
दोस्तो अगर आज की हालात को देखे तो कुछ ऐसा ही है, क्योंकि हम सभी, जो भी हमारा सहारा देने वाले प्राकृतिक संसाधन है इस पृथ्वी पर हमसब उसका नुकसान पहुंचा रहे है। जैसे आज सहारा देने वालीं जीवन दायिनी नदियां, पेड़ पौधो, जानवर, गाय, पर्वतो आदि को नुकसान पंहुचा रहे है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओ के रूप में हम सब भोग रहे है।



इन सभी परिणामों से बचने के लिए हमें प्रत्येक प्राकृतिक सम्पदा को बचना चाहिए, जिससे आने वाला कल हमारे बच्चों का  सुरक्षित हो सके।

Sunday, 24 December 2023

शवासन करने की विधी और लाभ | | Methods of doing Shavasana and its benefits.

December 24, 2023 0 Comments
शवासन में शरीर की स्थिति मुर्दों के समान होती है अंग-अंग ढीला छोड़कर शरीर और मस्तिष्क को इसमें पूर्णतः विश्राम की स्थिति में लाया जाता है।

प्रायोगिक विधि -  भूमि पर दरिया कंबल बिछाकर पीठ के बल चित्त लेट जाइए । दोनों पर फैले हुए हों और उनमें 1 फीट की दूरी हो पैर ढीला छोड़ने पर जिधर लुढ़कते हैं, लुढकने दीजिए।  बाहों को दोनों बगल में शरीर से थोड़ा हटाकर फैलाएं और हाथों को ढीला छोड़ दें।

हथेली ऊपर की ओर हो और अंगुलियां ढीली छोड़ने पर जैसे रहे, वैसे ही रहने दीजिए । इसके बाद स्वाभाविक गति से सांस लेते रहिए। आंखें बंद करके ढीला छोड़ दे।

शवासन में ध्यान - शवासन की अवस्था की अवस्था में मस्तिष्क के विचारों को शांत करने का प्रयत्न करें । किसी प्रफुल्लित करने वाली वस्तु पर चेतना को एकाग्रचित्त करें,  जिसमें काम संबंधी कोई भाव नहीं हो । इस आसन में ध्यान लगाने से एक समय ऐसा आएगा,  जब शरीर हल्का फुल्का लगेगा और चेतना उन्मुक्त सी लगेगी।

शवासन का लाभ - यह शरीर को पूर्णतया विश्राम प्रदान करता है। इससे थकावट दूर होती है। मानसिक तनाव दूर होता है। मन मस्तिष्क हल्का एवं प्रफुल्लित होता है।


सावधानी - शवासन में ध्यान लगाते समय शरीर और मस्तिष्क पर कोई भी दवा ना डालें। ध्यान में भी स्वाभाविक रूप से एक एकाग्रचित्तता को प्राप्त करने का प्रयत्न करें।

उत्तर दिशा की ओर सिर करके शवासन ना लगाएं । अच्छा हो कि सिर पूरब दिशा में रखें।

शवासन करवट लेट कर भी किया जा सकता है, लेकिन सबसे लाभप्रद चित्त लेटना ही है। 

Saturday, 23 December 2023

सुखासन करने की विधि और इसके लाभ । The method of Sukhasana and its benefits.

December 23, 2023 0 Comments


सुखासन - सुखासन का अर्थ है, वही आसन, जिसमें बैठने से आपको सुख मिले। यह स्पष्ट है कि यह आसन आराम से बैठने का आसन है और बहुत सरल है।


सुखासन करने से पहले सावधानी - इस आसन को करने के लिए आप उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ना बैठे हैं और उस दिशा मैं बैठकर इस आसन को कभी ना करें। इस आसन को करने से पहले आप अपने शरीर के मांसपेशियों को ढीला रखें। इस आसन को करते समय अपने कमर पीठ रीड गर्दन को सीधा रखें ताकि सुखासन करने में कोई दिक्कत ना हो और इस आसन को आप आसानी से कर सकें। सुखासन में ध्यान लगाते समय मस्तिष्क से सभी चिंता को निकाल दे और अपने मस्तिष्क को स्वतंत्र छोड़ दें ताकि विचारों की धारा का समन हो सके।


सुखासन करने की विधि - सुखासन एक सरल आसान है इस मुद्रा में हम दैनिक जीवन में अक्सर बैठते हैं किंतु हम उसे सुखासन नहीं कह सकते हैं। कारण यह है कि हम मुद्रा तो वह बना लेते हैं किंतु इसके नियमों का सूक्ष्मता गून का पालन नहीं करते है।


सुखासन के लिए एक दरी या कंबल भूमि पर बिचाएँ। अब आप घुटनों को मोर कर पल्थी मारकर बैठ जाएं। अब आप हाथों को आगे स्वाभाविक रूप से ढीला छोड़ दें। हाथ घुटनों पर भी रखा जा सकता है, पर ढीला रखें। अब आप यहां पर कमर, पीठ, रीढ़, और गर्दन को पूरी तरह सीधे रखें। आप अपनी मांसपेशियों के ऊपर कोई दबाव ना दे जैसे आपको आराम मिलता हो आप इस आसन में उसी तरह बैठे हैं।


सुखासन में ध्यान -  सुखासन में सभी ध्यान क्रियाएं की जा सकती है, जो पद्मासन में की जाती है। त्राटक (हठयोग में किसी बिंदु पर ध्यान जमाना) के अभ्यास के लिए प्रारंभ में इसी आसन का प्रयोग उचित है। बाद में आप त्राटक (हठयोग में किसी बिंदु पर ध्यान जमाना) का अभ्यास पद्मासन में बैठकर कर सकते हैं।


सुखासन करने से लाभ - बैठ कर करने वाले किसी कार्य के लिए यही आसन उपयुक्त है इस आसन को करने से आपको जल्दी थकावट नहीं होता है। इस आसन को करने से आपका मेरुदंड (रीड का हड्डी) सीधा होता है और आपके शरीर को एक सुंदर आकार देता है। सुखासन में कमर मेरुदंड (रीड का हड्डी) आदि में लचीलापन आता है जिसके कारण आप किसी भी कार्य को करने में आपको थकावट का अनुभव कम होता है।

 

7 Health Benefits Of Honey That Could Heal Your Whole Body

December 23, 2023 0 Comments

 7 Health Benefits Of Honey That Could Heal Your Whole Body

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Original Organic Honey
Nectar contains a money box of covered up healthful and restorative incentive for a considerable length of time. The sweet brilliant fluid from the apiary is a prevalent kitchen staple stacked with antibacterial and antifungal properties that have been utilized since the beginning of Egyptian tombs.

Nectar's logical superpowers add to its limitlessly touted medical advantages for the entire body. The sound common sugar offers numerous wholesome advantages relying upon its assortment. Crude nectar is the unpasteurized form of ordinarily utilized nectar and just contrasts in its filtration, which expands its timeframe of realistic usability. A tablespoon of crude nectar contains 64 calories, is without fat, sans cholesterol, and sans sodium, says the National Honey Board. Its organization is around 80 percent starches, 18 percent water, and two percent nutrients, minerals, and amino acids.

Ordinarily, nectar is sweet yet can be pitiless to babies. Spores of Clostridium botulinum microbes — found in earth and residue, which can pollute nectar — may prompt newborn child botulism and produce a poison inside the body that can cause muscle shortcoming and breathing issues. The Mayo Clinic suggests holding up until following a year of age to give babies nectar; utilization is ok for more established grown-ups and kids since they have a develop stomach related framework that can deal with the spores.

Expand nectar capably and receive the various wellbeing rewards of this fluid gold.

1. Reduces Allergies

Nectar's mitigating impacts and capacity to relieve hacks has prompted the conviction it can likewise diminish occasional sensitivity side effects. Despite the fact that there are no clinical investigations demonstrating its viability, Dr. Matthew Brennecke, a board confirmed naturopathic specialist rehearsing at the Rocky Mountain Wellness Center in Fort Collins, Colo., disclosed to Medical Daily in an email, "A typical hypothesis is that nectar demonstration like a characteristic immunization." It contains little measures of dust, which if the body is presented to little measures of it, it can trigger a resistant reaction that produces antibodies to the dust. "After the rehashed presentation, you should develop these antibodies and the body ought to wind up acquainted with their quality so less histamine is discharged, bringing about a lesser hypersensitive reaction."

2. All-Natural Energy Drink

Nectar is an astounding wellspring of all-regular vitality at only 17 grams of starches for each tablespoon. This common natural sugar — fructose and glucose — straightforwardly enter the circulatory system and can convey a fast increase in vitality. The ascent in glucose goes about as a transient vitality hotspot for your exercise, particularly in longer continuance works out.

Brennecke said there is a con to adding nectar to your exercise. "In the event that your objective in practicing is to build bulk, working out on a vacant stomach before anything else is the best approach. At the point when your body is in starvation mode (after waking in the morning), and you begin working out, you discharge insulin-like growth factor-1 (IGF-1), which will enable you to assemble mass," he said. Brennecke warns this possibly works when blood sugars are low.

3. Lifts Memory

The sweet nectar is stacked in cancer prevention agents that may help counteract cell harm and misfortune inside the cerebrum. A recent report distributed in Menopause found a day by day spoonful of Malaysian nectar may help postmenopausal ladies' memory, which can give an elective treatment to the hormone-related scholarly decay. Following four months of taking 20 grams of nectar daily, the ladies were bound to have preferable transient memory over their partners who took hormone pills.

Nectar's capacity to enable the body to ingest calcium, as per Brennecke, enables help to cerebrum wellbeing. The mind needs calcium so as to process thought and decide. "As our populaces keep on getting more seasoned and more seasoned, the probability of dementia setting in as a result of poor admission of nutrients and minerals keeps on getting ever more elevated," he said.

4. Hack Suppressant

Nectar can be the all-normal fix with regards to annoying colds. A steady hack that won't leave can without much of a stretch be cured with two teaspoons of nectar, as per a recent report distributed in the diary Pediatrics. Youngsters between the ages of 1 and 5 with evening time hack because of colds hacked less much of the time when they got two teaspoons of nectar 30 minutes before bed.

The brilliant fluid's thick consistency helps coat the throat while the sweet taste is accepted to trigger nerve endings that shield the throat from relentless hacking. Nectar is accepted to be as powerful as the regular hack suppressant fixing dextromethorphan. It tends to be utilized in treating upper respiratory tract contaminations.

5. Tranquilizer

Nectar can be a wellbeing help for restless evenings. Like sugar, nectar can cause an ascent in insulin and discharge serotonin — a synapse that improves the state of mind and joy. "The body changes over serotonin into melatonin, a substance intensifies that directs the length and the nature of rest," Rene Ficek, enlisted dietitian and lead dietitian nutritionist at Seattle Sutton's Healthy Eating in Chicago, Ill., disclosed to Medical Daily in an email.

Additionally, nectar likewise contains a few amino acids, including tryptophan that is usually connected with turkey. Nectar's enduring ascent in insulin, as indicated by Brennecke, makes the tryptophan in nectar enter the mind, where it's at that point changed over into serotonin and after that into melatonin, which is a tranquilizer. This hormone is in charge of directing rest and wake cycles.

6. Treats Dandruff

Nectar can convey impermanent alleviation to the scalp by focusing on dandruff. A recent report distributed in the European Journal of Medical Research discovered applying nectar weakened with 10 percent warm water to issue regions and abandoning it on for three hours previously flushing prompted tingle alleviation and no scaling inside seven days. Skin sores recuperated inside about fourteen days and patients even demonstrated an improvement in male pattern baldness. The patients did not backslide even following a half year of utilization.

Because of nectar's antibacterial and antifungal properties, it can likewise treat seborrheic dermatitis and dandruff, which are regularly brought about by an abundance of the organism. In addition, "nectar likewise has calming properties, which address the redness and tingling on the scalp," Brennecke said.

7. Treats Wounds And Burns

Nectar is a characteristic anti-microbial that can demonstrate both inside and remotely. It very well may be utilized as a traditional treatment for wounds and consumes by cleaning wounds and injuries from real types of microscopic organisms, for example, methicillin safe Staphylococcus aureus (MRSA). A recent report distributed in the British Journal of Surgery discovered everything except one of the patients who experienced injuries and leg ulcers indicated momentous improvement subsequent to applying a topical use of nectar.

Dr. Diane Radford, a bosom careful oncologist in St. Louis, Mo., revealed to Medical Daily in an email, Manuka nectar has antibacterial properties for wound recuperating. "The antecedent for the dynamic antibacterial specialist methylglyoxal (MGO) originates from the nectar of mānuka trees. A particular research unit at the University of Waikato is investigating the change to the dynamic item," she said.


Nectar has been used for its restorative properties for more than 2,000 years and proceeds with its inheritance as a multipurpose wellbeing help.

Friday, 22 December 2023

ज्ञानमुद्रा आसन करने की विधि और इसके लाभ। Gyan Mudra asana method and its benefits

December 22, 2023 0 Comments

 

Gyan mudra aasan
Gyan mudra aasan
परिचय - ज्ञानमुद्रा आसन बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। इस आसन में ही हमारे सभी ऋषिमुनी बैठ कर ज्ञान, ध्यान, और चिंतन करते थे। इस आसन में सबसे खास बात यह है कि, इसमें अपने हाथों की अंगुलियों को अंगूठे और तर्जनी को एक साथ मिलकर रखा जाता है। 

हम जानते है कि हमारे अंगूठे में अग्नि तत्व और तर्जनी में वायु तत्व होते है जिसको मिलाने से हमारी शरीर की कोशिकाएं और ज्ञान तंतु जो सुप्त अवस्था में है, उसको सक्रिय करने में सहायता करती है।


ज्ञान मुद्रा आसन करने से पहले सावधानियां - योगासनों के करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, जिससे योगासनों का अधिक से अधिक लाभ मिल सके और अज्ञानता के कारण होने वाली भूलो के कारण किसी भी दुष्परिणाम से बचा जा सके। 

चाय या दूध पीने के तुरंत बाद कोई भी आसन या व्यायाम ना करें। योगासन करते समय शरीर के साथ जोर जबरदस्ती बिल्कुल ना करें। क्रोध या अत्यंत शोक में आसन ना करें। ऐसे समय में आसन करने से लाभ के बजाय हानि होती है । आसन करते समय बुरे विचार एवं मानसिक तनाव से बचना आवश्यक है।


ज्ञानमुद्रा आसन करने की विधि -  सबसे पहले आप अपने तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में, बीच में या सिरे पर लगाइए । शेष या बाकी तीनों अंगुलियों को मिलाकर फैलाए सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन की मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। इस प्रकार से आप ज्ञान मुद्रा आसन को बना सकते है।


ज्ञानमुद्रा आसन में ध्यान - यह चिंतन करने का आसान है । किसी विषय या उलझन से भरे विषय पर सोचना हो, तो यह मुद्रा उसमें अप्रत्याशित सहायता करती है।  अनेक भारतीय ऋषि दार्शनिकों ने दार्शनिक तथ्यों का चिंतन इसी मुद्रा में किया है।


ज्ञानमुद्रा आसन करने से लाभ - ज्ञान मुद्रा बहुत ही उपयोगी आसन है इस आसन को करने से हमें मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस आसन को करने से हमें एकाग्रता का विकास होता है। इस आसन को करने से विचारों की तारतम्यता (भाव) का विकास होता है।


इस आसन को करने से धीरे-धीरे कोष्टबद्धता दूर हो जाती है।
योग का पूर्ण रूप से लाभ लेने के लिए मांसाहार एवं किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का त्याग कर देना ही अच्छा होता है क्योंकि ज्यादा लाभ लेने के लिए यह सारी चीजें का त्याग ही  बहुत बड़ा विकल्प है। क्योंकि आरोग्यता एवं प्राकृतिक दृष्टि से शाकाहार ही सर्वश्रेष्ठ है।

Wednesday, 20 December 2023

मैं आत्मा, जो हमेशा से है हमेशा रहेगी | I am soul who is always exist and alive

December 20, 2023 0 Comments

सारी जिन्दगी हम इस शरीर के लिएे भागते रहते है जो कि एक दिन अवश्यमेव छोड़ना पड़ेगा । हम यदि अभी भी यह समझ जायें कि हम शरीर नही है, शरीर तो एक दिन छोड़ना होगा । छोड़ेगा कौन ? मैं आत्मा, जो हमेशा से है हमेशा रहेगी। 

यह मनुष्य जीवन मिला ही हमें इसीलिये है कि हम यह समझ सकें कि मैं हूँ कौन ?

हम (आत्मा) 84 लाख योनियों में जिस भी शरीर मे गये उसी शरीर को हमने मैं (मैं यह शरीर हुँ) मान लिया, और उसी के लिएे यह 4 चार काम करने लगा,

१ शरीर का पेट भरना ।
२ सोना ( निद्रा) ।
३ सन्तानोप्ति (Sex)
४ शरीर की रक्षा

इस मानव शरीर को पाकर भी क्या हम यही चार कार्य नहिं कर रहें है क्या यह सोचें ?

हमें यह मनुष्य जीवन मिला है अपनी आत्मा का पेट भरने के लिये क्या मैनें  आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न किया नहि किया तो कब करुँगा, इस मानव तन के रहते रहते ही हम आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न कर सकते है, मानव शरीर छिन जाने के बाद नही, फिर पता नही कब यह मानव शरीर  मिले ? 

हिन्दू धर्म के 16 संस्कार में यज्ञोपवीत संस्कार | 16 sacraments of sacred thread in Hindu religion

December 20, 2023 0 Comments

हिन्दू धर्म के 16 संस्कार में यज्ञोपवीत संस्कार

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

प्रजापति ने स्वाभाविक रूप से जनेऊ निर्माण किया है। जनेऊ का धागा कच्चे सूत से बना हुआ होता है। जनेऊ को व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर इस प्रकार पहना जाता है कि दाईं कमर के नीचे तक पहुच जाये। यह आयु, विद्या, यश और बल को बढ़ानेवाला है।

हिंदू धर्म के महत्त्वपूर्ण 16 संस्कारों में एक संस्कार जनेऊ / यज्ञोपवीत संस्कार भी है । भारतीय हिन्दू धर्म में 16 संस्कार निम्नलिखित है।

      गर्भाधान

      पुंसवन

      सीमन्तोन्नयन

      जातकर्म

      नामकरण

      निष्क्रमण

      अन्नप्राशन

      चूड़ाकर्म

      विद्यारम्भ

      कर्णवेध

      यज्ञोपवीत / जनेऊ

      वेदारम्भ

      केशान्त

      समावर्तन

      विवाह

      अन्त्येष्टि

जनेऊ / यज्ञोपवीत संस्कार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्त्वपूर्ण  है।

*जनेऊ के तीन सूत्र के सम्बन्ध में मत्त्वपूर्ण बातें !*

यह तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं।

यह तीन सूत्र सत्व, रजस् और तमस् का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र शरीर में उपस्थित प्राण शक्ति इडा, पिंगला तथा सुषुम्ना नाड़ी का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र गायत्री मंत्र विद्यमान चरणों का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र तीन आश्रमों ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र  तीनो काल  भूतकाल, वर्तमानकाल तथा भविष्यतकाल का भी प्रतीक है।

यह काल रक्षक के रूप में भी प्रतिष्ठित है।

यह तीन सूत्र  त्रिदोष कफ, पित्त तथा वात्त को भी नियंत्रित करता है। 

*जनेऊ में उपसूत्र*

जनेऊ में कुल ९ सूत्र और उपसूत्र होते है।  ऊपर तीन सूत्र बताया गया है परन्तु प्रत्येक तीन सूत्रों तीन तीन उपसूत्र होते है इस प्रकार कुल ९ सूत्र और उपसूत्र हो जाते है। इस तरह कुल सूत्रों की संख्या नौ हो जाती है। नौ सूत्रों का संकेत निम्न प्रकार से है –

मुख,     1

नसिका  2

आंख     2 

कान     2

मूत्र द्वार  1

मल द्वार 1  

इस प्रकार सभी मिलकर कुल 9 हो जाते हैं। इसका अर्थ है कि हम मुख से सत्य और प्रिय वचन बोले और खाएं, नेत्रो से सूंदर देंखे और कानों से सुवचन सुने।

*जनेऊ की लंबाई कितनी होती है*

जनेऊ/यज्ञोपवीत की लंबाई भी निश्चित होती है ।जनेऊ बनाते समय लम्बाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि लम्बाई कम है तो वह दोष माना जाता है। जनेऊ की लम्बाई 96 अंगुल होती है। जनेऊ की लम्बाई यह सूचित करता है कि जो भी इसे धारण करें उसे  32 विद्याओं (चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक ) और 64 कलाओं को जानने और सीखने का प्रयास करना चाहिए। 64 कलाओं में जैसे- साहित्य कला, कृषि ज्ञान, वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी,  दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण आदि।

*जनेऊ में कितने गाँठ होते है*

जनेऊ /यज्ञोपवीत में पांच गाँठ लगाई जाती है जो  धर्म, अर्ध, काम, मोक्ष और ब्रह्म का प्रतीक है। यह पांच यज्ञों, ऋषि यज्ञ, देव यज्ञ, बलि वैष्वानर यज्ञ, अतिथि यज्ञ व पितृ यज्ञ नामक पांच यज्ञों का नित्य विधान बताया गया है।  पञ्च ज्ञानेद्रियों (आंख कान नाक त्वचा जिह्वा) और पंच कर्मों का  प्रतीक है।

*जनेऊ धारण करने की आयु*

प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी उस समय प्राय: 8  वर्ष की उम्र में यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हो जाता था। इसके बाद बालक पढने के लिए गुरुकुल चला जाता था। यज्ञोपवीत संस्कार से ही बालक को ब्रह्मचर्य की दीक्षा दी जाती थी जिसका पालन गृहस्थाश्रम में आने से पूर्व तक किया जाता था। इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य अनुशासित जीवन व्यतीत करने से है।

जनेऊ धारण करने का उम्र मुख्यतौर पर बालक के जन्म से ब्राह्मण 8 वें वर्ष में, क्षत्रिय 11 वे, तथा वैश्य 12 वे वर्ष में यज्ञोपवीत धारण  करें। किसी  कारणवश इस काल विशेष में यज्ञोपवीत संस्कार नहीं हो सका तो  ब्राह्मण 16 वें वर्ष में, क्षत्रिय 22 वे, तथा वैश्य 24 वे वर्ष में यज्ञोपवीत संस्कार करा सकते है। ब्राम्हण का वसंत ऋतु में, क्षत्रिय का ग्रीष्म में और वैश्य का उपवीत शरद ऋतु में होना चाहिए।

*वैज्ञानिक दृष्टि में जनेऊ का महत्त्व*

वैज्ञानिक दृष्टि से भी जनेऊ पहनना स्वास्थ्य के दृष्टि से लाभदायक है। यह हमें स्वस्थ्य बनाये रखने में सहायता करता है। 

जनेऊ के हृदय मध्य से गुजरता है अतः यह हृदय रोग से बचाता है।

हमारे कान में एक नस होता है जीका  जिसका सीधा सम्बन्ध मस्तिष्क से होता है जब जनेऊ  के माध्यम  से यह नस दबता है है तो मस्तिष्क की कोई सोई हुई तंद्रा कार्य करने लगती है जो हमें स्मरण शक्ति एवम विवेकशक्ति बढ़ाने में कार्य करती है।

हमारे दाएं कान की नस अंडकोष और गुप्तेन्द्रियों से जुड़ी होती है। मूत्र विसर्जन के समय दाएं कान पर जनेऊ लपेटने से शुक्राणुओं की रक्षा होती है।

मल-मूत्र करने से पहले जनेऊ को  हम कानों पर कस कर दो बार लपेटते हैं जिससे कान के पीछे की नसें, जिनका संबंध पेट की आंतों से होता है,नस के दबने से आंतों पर भी दबाव पड़ता है जिससे मल विसर्जन आसानी से हो जाता है।

कान के पास ही एक ऐसा नस होता है जो मल-मूत्र विसर्जन के समय सक्रिय होता है उससे कुछ द्रव्य निकलता है। जनेऊ उस द्रव्य को रोक देता है, जिससे पेट के रोग,  कब्ज, एसीडीटी,  मूत्रन्द्रीय रोग,  हृदय के रोग, रक्तचाप जैसे अन्य संक्रामक रोग होने से रोकते है।

यह हमें बार-बार आने वाले  बुरे स्वप्नों से भी मुक्ति दिलाती है | कान में जनेऊ लपेटने से मनुष्य में सूर्य नाड़ी जाग्रत हो जाता है जिससे मनुष्य में दिव्यता बनी रहती है।

जनेऊ पाचन संस्थान को ठीक करता है और पेट तथा शरीर के निचले अंगों में विकार नहीं लाने देता है। जनेऊ ‘एक्यूप्रेशर’ के विकल्प के रूप में भी कार्य करता है। जनेऊ हमें लकवा अथवा पक्षाघात बीमारियों से बचाता है। 

Monday, 18 December 2023

आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें। Prana Mudra - How To Do Steps And Its Benefits

December 18, 2023 0 Comments

 आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें।]


Prana Mudra
Prana Mudra
आजकल आंखों की समस्या होना आम बात हो गई है। आजकल डिजिटल समय में लोग हमेशा मोबाइल, कंप्यूटर पर दिन-रात अपने जरूरी कामों में लगे रहते हैं, जिसके कारण आंखों में समस्या होना आम बात हो गई है। इस पोस्ट में आपको 'प्राण मुद्रा' के अद्भुत गुण के बारे में बताएंगे जिसको करने से आपको अद्भुत लाभकारी फायदे होंगे।


प्राण मुद्रा करने की विधि

प्राण मुद्रा में कनिष्ठा (छोटी अंगुली), अनामिका (तीसरी अंगुली) एवं अंगूठे का अग्रभाग को एक साथ मिलाना पड़ता है और बाकी दोनों अंगुलियों को सीधा रखिए और इस प्रकार आपके हाथो में प्राण मुद्रा का आकार बन जाएगा। 30 सेकंड तक इसी आकार में अपने हांथो की  अंगुलियों को रखे। प्राण मुद्रा 15 से 20 बार करे जिससे आपको काफी लाभ मिलेगा। ऊपर दिए हुए चित्र अनुसार आप अभ्यास कर सकते है।


प्राण मुद्रा के अद्भुत लाभ

इस मुद्रा के नाम से ही समझ सकते है कि ये मुद्रा प्राण दायी है। प्राण के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता। इस मुद्रा को करने से प्राणों की सोई हुई शक्ति वापस लौट आती है । शरीर और मन में अलग से एक सक्रात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। अगर आप आंखो के किसी भी समस्या से परेशान है तो इस मुद्रा को करने से आपको 1 महीना के अंदर आपको फर्क साफ महसूस होने लगेगा। इस मुद्रा को करने से आंखो में अद्भुत रोशनी बढ़ने लगती है और आप किसी भी नंबर का चस्मा क्यों ना पहनते हो, इस मुद्रा से एक महीने के अंदर चस्मा हटाने में मदद करता है। लगातार एक महीने तक इस मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी आंखों की रोशनी बढ़ जाती है। लंबे समय तक प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से उपवास में भी भूख नहीं लगती। अनिद्रा रोग में ज्ञान मुद्रा के साथ यह व्यायाम करने पर सुफल लाभ प्राप्त होता है।

दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ | Ten major yoga Mudra and its benefits

December 18, 2023 0 Comments

हम जानते है कि हमारा शरीर पाँच तत्व से मिलकर बना है। अग्नि, वायु, पानी, धरती और ईथर, जिसमे हमारी हांथो की अंगुलियाँ इसका प्रतिक है। मुद्रा योग एक प्रकार का हाथों का योग है जिसमे हम अपने अँगुलियो को आपस में जोड़ने से योग मुद्रा बनती है। जिसको करने से हम शरीर के चुम्बुकिये तरंगे को सक्रिये करते है । 


मुद्रा योग के द्वारा हम अपने शरीर को वात, पित और कफ को संतुलन बनाये रखते है। जब हमारा शरीर असंतुलित हो जाता है तब हमारे शरीर में वात या पित या फिर कफ का असंतुलित मना जाता है | मुद्रा योग से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके कारण हमारा शरीर संतुलन बनाये रखता है। 

इस पोस्ट में हम दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ के बारे में जानेंगे ।

1. शुक्राणुओं की संख्या | Sperm Count

अपने कलाई पर इस बिंदु को मालिश करके अपने शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा दें। | boost your sperm production by massaging this point on your wrist.

2. दमा । Asthma 

सांस लेने में सहायता करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to aid breathing

3. सर्दी । Colds 

साइनस से छुटकारा पाने के लिए बड़े पैर की उंगलियों पर इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point on the big toes to get rid sinuses.

4. माइग्रेन | Migraine

प्रत्येक उंगली की युक्तियों को मालिश करें । Massage the tips of each finger.

5.गठिया | Arthritis

जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस बिंदु को मालिश करें । Massage this points to relieve stiffness from joints.

6. उच्च रक्तचाप | Hypertension

रक्त प्रवाह को आराम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage at this point to relax the blood flow.


7.अनिद्रा | Insomnia

विश्राम को बढ़ावा देने और नींद को प्रेरित करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point to promote relaxation and induce sleep.


8.मासिक धर्म ऐंठन | Menstrual cramps

इस बिंदु को गर्भाशय में आराम करने और मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने के लिए मालिश करें । Massage this point to relax uterus and reduce pain during menstruation.

9. डिप्रेशन | Depression

सेरोटोनिन (खुशी हार्मोन) को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पैर की अंगुली के शीर्ष पर इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point on the top of each toe to promote serotonin(happiness hormones).

10. जी मिचलाना | Nausea

जी मिचलाना के लक्षणों को कम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to subside the symptoms of nausea.

भारत की संस्कृति को पहचाने | Recognize India's Culture

December 18, 2023 0 Comments

 *भारत की संस्कृति को पहचाने !*

*ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये.!*
*खासकर अपने बच्चो को बताए क्यों कि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...*

             *⌛दो पक्ष⌛*
१-कृष्ण पक्ष ,    २-शुक्ल पक्ष❗

        *🙏तीन ऋण🙏*
१-देवऋण , २-पितृऋण, ३-ऋषिऋण❗

         *🏉चार युग🏉*
१-सतयुग ,  २-त्रेतायुग ,
३-द्वापरयुग ,  ४-कलियुग❗

        *🌷चार धाम🌷*
१-द्वारिका , २-बद्रीनाथ ,
३-जगन्नाथपुरी , ४-रामेश्वरमधाम❗

       *🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*) 
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗

          *⌛चार वेद⌛*
१-ऋग्वेद , २-अथर्ववेद ,३-यजुर्वेद , ४-सामवेद!

            *🍁चार आश्रम🍁*
१-ब्रह्मचर्य , २-गृहस्थ , ३-वानप्रस्थ , ४-संन्यास❗

           *🏉चार अंतःकरण🏉*
१-मन , २-बुद्धि , ३-चित्त , ४-अहंकार❗

          *🍁पञ्च गव्य🍁*
१-गाय का घी , २-दूध , 
दही ,३-गोमूत्र , ४-गोबर❗

         *🙏पञ्च देव🙏*
१-गणेश , २-विष्णु , ३-शिव , ४-देवी ,५-सूर्य

          *🕹पंच तत्त्व🕹*
१-पृथ्वी ,२-जल , ३-अग्नि(तेज) , ४-वायु , ५-आकाश❗

        *⌛छह (षट्दर्शन) दर्शन⌛*
१-वैशेषिक , २-न्याय ,३-सांख्य , ४-योग , ५-पूर्व मिसांसा , ६-उत्तर मिसांसा❗

       *🌷  सप्त ऋषि🌷*
१-विश्वामित्र ,२-जमदाग्नि ,३-भरद्वाज , ४-गौतम , ५-अत्री , ६-वशिष्ठ और कश्यप❗

          *🍁सप्त पुरी🍁*
१-अयोध्यापुरी ,२-मथुरापुरी ,
३-मायापुरी *(हरिद्वार)*, ४-काशीपुरी ,
५-कांचीपुरी *(शिन कांची-विष्णु कांची),*
६-अवंतिकापुरी और 
७-द्वारिकापुरी❗

          *⌛आठ योग⌛*
१-यम , २-नियम , ३-आसन ,४-प्राणायाम , ५-प्रत्याहार , ६-धारणा , ७-ध्यान, एवं ८-समािध❗

          *🙏आठ लक्ष्मी🙏*
१-आग्घ , २-विद्या , ३-सौभाग्य ,४-अमृत , ५-काम , ६-सत्य , ७-भोग ,एवं ८-योग लक्ष्मी❗

             *🌹नव दुर्गा 🌹*
१-शैल पुत्री , २-ब्रह्मचारिणी ,३-चंद्रघंटा , ४-कुष्मांडा , ५-स्कंदमाता , ६-कात्यायिनी ,७-कालरात्रि, ८-महागौरी एवं ९-सिद्धिदात्री❗

       *🍫 दस दिशाएं🍫*
१,पूर्व , २-पश्चिम , ३-उत्तर , ४-दक्षिण ,५-ईशान , ६-नैऋत्य , ७-वायव्य , ८-अग्नि 
९-आकाश, एवं १०-पाताल,❗

               *🏉मुख्य ११ अवतार🏉*
 १-मत्स्य , २-कश्यप , ३-वराह , ४-नरसिंह , ५-वामन , ६-परशुराम ,७-श्री राम , ८-कृष्ण , -बलराम , १०-बुद्ध एवं ११-कल्कि❗

         *🍁बारह मास🍁*
१-चैत्र , २-वैशाख , ३-ज्येष्ठ ,४-अषाढ , ५-श्रावण , ६-भाद्रपद , ७-अश्विन , ८-कार्तिक ,९-मार्गशीर्ष , १०-पौष , ११-माघ , १२-फागुन❗

       *⌛ बारह राशी ⌛*
१-मेष , २-वृषभ , ३-मिथुन , ४-कर्क , ५-सिंह , ६-कन्या , ७-तुला , ८-वृश्चिक , ८-धनु , १०-मकर , ११-कुंभ , १२-कन्या❗

           *🙏बारह ज्योतिर्लिंग🙏*
१-सोमनाथ ,२-मल्लिकार्जुन ,३-महाकाल , ४-ओमकारेश्वर , ५-बैजनाथ , ६-रामेश्वरम ,७-विश्वनाथ , ८-त्र्यंबकेश्वर , ९-केदारनाथ , १०-घुष्मेश्वर, ११-भीमाशंकर ,१२-नागेश्वर!

       *💥पंद्रह तिथियाँ💥*
१-प्रतिपदा ,२-द्वितीय ,३-तृतीय ,४-चतुर्थी , ५-पंचमी , ६-षष्ठी , ७-सप्तमी , ८-अष्टमी , ९-नवमी ,१०-दशमी , ११-एकादशी , १२-द्वादशी , १३-त्रयोदशी , १४-चतुर्दशी , १५-पूर्णिमा, अमावास्या❗

           *🕹स्मृतियां🕹*
१-मनु , २-विष्णु , ३-अत्री , ४-हारीत ,५-याज्ञवल्क्य ,७-उशना , ७-अंगीरा , ८-यम , ९-आपस्तम्ब , १०-सर्वत ,१०-कात्यायन , १२-ब्रहस्पति , १३-पराशर , १४-व्यास , १५-शांख्य , १६-लिखित , १७-दक्ष , 
१८-शातातप , १९-वशिष्ठ

Sunday, 17 December 2023

पीरियड्स में अपनी देखभाल कैसे करें | Taking Care of Yourself During Period

December 17, 2023 0 Comments

 पीरियड्स हर महिला के जीवन का अहम हिस्सा हैं। इसके बीना औरते परिपूर्ण नहीं रहती। पीरियड्स का सामना हर महीने औरतो को करना पड़ता है। ये कम से कम 3 दिन या ज्यादा - से - ज्यादा 8 दिन तक रहता है। महिलाएं पीरियड्स में काफी चिरचिरा हो जाती हैं। क्योंकि औरतों को पेट के निचले हिस्से, कमर, पैर में दर्द रहता है | किसी को बहुत ज्यादा दर्द होता है तो किसी को थोड़ा कम। कभी - कभी तो कुछ महिलाएं दवा का भी सेवन करने लगती हैं। आपको बता दें कि ज्यादा दवा पीरियड्स में लेने से सेहत को नुक्सान भी पहुंचता है।


सावधानियां ‌:- पीरियड्स में औरतों को अपनी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। वजनदार सामान नहीं उठाना चाहिए। ज्यादा दौराना नहीं चाहिए। ये सब करने से खुन का बहाव ज्यादा मात्रा में होने लगते है। जो कि आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता हैं।

पीरियड्स में होने वाले दर्द का घरेलू उपचार 


घरेलू उपचार पीरियड्स में होने वाले दर्द में आराम देता है वो इस प्रकार हैं   

(1) गर्म पानी को बोतल या बैग में भरें और अपने पेट पर रखे।

(2) उबलते हुए पानी में थोड़ा अदरक, अजवाइन और कुछ तुलसी के पत्ते को मिलाकर अच्छे से उबाल लें और फिर उसे छननी से छान लें और उसमें थोड़ा शहद, थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर हल्का गर्म - गर्म पीए।

(3) पीरियड्स में शरीर से आयरन और विटामिन ज्यादा खर्च होते हैं इसलिए खान - पान का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। नहीं तो अगले पीरियड्स में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तो इस दौरान हरी सब्जियां, फल, दूध आदि का सेवन करें।

(4) मासिक धर्म मे अगर ज्यादा तकलीफ होती है, तो पीरियड्स आने के पहले से ही थोड़ी व्यायाम, योग शुरू कर देना चाहिए ताकि पीरियड्स आने पर दर्द कम हो।

(5) एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीएं। हल्दी शरीर को गर्म बनाती है जिससे पीरियड्स में होने वाले दर्द और परेशानी कम हो जाते हैं

तो इस तरह की देखभाल से आप अपने पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं।

एक दिन में आदमी को पानी पीना कितना जरूरी है । How much is it necessary for a person to drink water in a day.

December 17, 2023 0 Comments

पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। इसलिए तो कहा गया है जल ही जीवन है। जीवन मनुष्य का हो या जीव जंतु का हो या पेड़ पौधे का सभी के लिए पानी जरूरी होता है। हम सभी जानते हैं कि जन्म के समय मनुष्य का शरीर 75% पानी से बना होता है। लेकिन जैसे-जैसे हमारा शरीर बढ़ता है तो पानी का मात्रा कम होता जाता है। 


युवा होने पर एक महिला के शरीर में 55% पानी की मात्रा होती है, तो एक नौजवान पुरुष के शरीर में 60% प्रतिसत। हमारे शरीर में सभी अंगों को सही तरीके से रख-रखाव के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। कोई भी व्यक्ति बिना खाना के कुछ दिन तक रह सकता है पर पानी के बिना नहीं रह सकता। 

पानी के कुछ नियम होते है जिन्हें पालन करने से हमारे शरीर को कोई बीमारी होने का खतरा नहीं रहता है।

पानी का मात्रा -  बताये गए सलाह के अनुसार दिन भर में 2.5 से 3.5 लीटर तक पानी पीना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुछ वर्क आउट करता है तो उसे थोड़ी पानी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। मल, पेशाब, अौर पसीने के कारण हमारे शरीर से प्रतीदिन 2 से 3 लिटर पानी बाहर निकल जाता है। एक-दूसरे से बात-चीत करने पर भी हमारे शरीर का पानी वाष्प बनकर बाहर निकलता है।

ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है तो वहीं जरुरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे किडनियों के लिए हानिकारक भी हो सकती है। आपके शरीर में पानी की मात्रा सही है कि नहीं यह हमें पेशाब से पता चलता है। यदि आपके पेशाब का रंग साफ है तो आपका शरीर हाइड्रेटेड यानि बिलकुल सही है और अगर पेशाब का रंग पीला है तो आपका शरीर डेहाइड्रेटेड है यानि बिल्कुल स्वस्थ है।

पानी कब नहीं पीना चाहिए -
(1) ज्यादातर लोग खाने के साथ- साथ पानी भी पीते हैं जो कि यह बिल्कुल भी नही करना चाहिए। ऐसा करने से खाना पतला हो जाता है और अच्छी तरह से पाचन नहीं हो पाता

(2) पेशाब करने के तुरंत बाद पानी न पिएं। क्योंकि जब हम पेशाब करते है तो हमारे शरीर के अंदरूनी अंग तेजी से सिकुड़ने लगते है और ऐसी स्थिति में तुरंत पानी पीने से नसें और अंदरूनी अंग कमजोर हो जाते हैं।

(3) गर्म चाय या कॉफी पीने के तुरंत बाद पानी न पिएं। ऐसा करने से हमारे टांसिल और गले को नुक्सान पहुंचता है।

(4) रसीले, खट्टे फल खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं। और ऐसा करते है तो आपको ठंड लग सकता है या पेट खराब हो सकती है।

पानी पीने का समय -  सुबह मल या पेशाब करने के पहले एक गिलास पानी जरूर पिएं क्योंकि सुबह के समय बनने वाली लार में हमारे शरीर के लिए आवश्यक सभी तरह के एंजाइम्स होते हैं जो कि खाली पेट पानी पीने से यह हमारे शरीर में चले जाते हैं और हमारे सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। खाना खाने के 40 मिनट पहले, और खाना खाने के 40 मिनट बाद ही पानी पिएं। अगर खाने के तुरंत बाद प्यास लगती है, तो जुस पी लेना चाहिए।

पानी कैसे पियें- पानी हमेशा धिरे-धिरे और बैठकर पीना चाहिए। धिरे-धिरे पानी पीने से मुंह का लार हमारे शरीर में जाता है और पानी को पचाता है। हमारा शरीर एक बार में 200 से 250ml तक ही पानी पचाता है। जल्दी-जल्दी पानी पीने से हम ज्यादा पानी पी लेते हैं और वह हमारे शरीर में नहीं लगता और यह पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है।

खरे होकर पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसा करने से हमारे शरीर के अंदर पानी के साथ-साथ हवा भी चला जता है जिससे शरीर के अंदर खिंचाव और दबाव होता है इसलिए हमेशा बैठकर और धिरे-धिरे और किसी पात्र में मुंह लगाकर पानी पिएं। इससे हमारा PH लेवल कंट्रोल में रहता है। मुंह की लार पेट में जाती है और पाचन अच्छा रहता है। पेट की एसीड को शांत रखता है और पेट में चर्बी नहीं होने देता है।

Saturday, 16 December 2023

अलसी या तीसी सेवन करने के फायदे । Benefits of consuming flax seeds.

December 16, 2023 0 Comments

 

अलसी को कुछ लोग तीसी भी कहते हैं । यह एक ऐसा बीज है जिसे हर वैध अपने दवा में शामिल करते हैं,  क्योंकि अलसी में प्रोटीन, ओमेगा-3, कॉपर, मैग्नीशियम, विटामिन बी कॉन्प्लेक्स काफी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है । 

अलसी अनेक रोगों का रामबाण इलाज है अलसी का सेवन करने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं जैसे गठिया, कैंसर, डायबिटीज, दमा और पेट की चर्बी ।

अलसी का सेवन आप अनेक रूपों में कर सकते हैं । अलसी को हल्का सुनहरा भुने और इसका पाउडर बना लें और इसे अपने डाइट में शामिल करें । अलसी के पाउडर को आप पराठा भी बना सकते हैं या इसे दो चम्मच सुबह दो चम्मच शाम को पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं। बच्चे बड़ों सबके लिए अलसी बहुत फायदेमंद होता है। बच्चों को खिलाने से बच्चे का दिमाग तेज होता है क्योंकि अलसी में डीएचए (DHA) पाया जाता है जैसे dry fruits हमारे सेहत के लिए अच्छा होता है ठीक उसी तरह अलसी का बीज भी |

जिस तरह अलसी का सेवन करना जितना लाभदायक है उतना इसका तेल भी लाभकारी है अलसी का तेल आपके जकड़े हुए पुराने दर्द से राहत देता है, घुटनों का दर्द, कमर दर्द अनेक प्रकार के दर्द में यह अलसी का तेल लाभदायक है|  झड़ते बालों को भी रोकने में मददगार है|  इसका तेल का मालिश आपके बालों को लंबा, घना और चमकदार बनाता है और नए बाल उगा देता है और तो और चेहरों के लिए भी बहुत अच्छा हैं। 

इसमें मौजूद ओमेगा 3 आपके चेहरे को साफ करता है और आपके चेहरे को मुरझाने नहीं देता है I इसका तेल रात में सोने के समय चेहरे पर लगाकर सोने से चेहरे के काले धब्बे दाने को हटाता है और कभी भी दाने को आपके चेहरे पर नहीं होने देता है और सबसे विशेष बात यह सबसे खतरनाक बीमारी कैंसर जैसे रोगों से लड़ता है, तो आपको पता ही चल गया होगा यह अलसी कितना हम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है तो इसका सेवन जरूर करे।

प्राणायाम जीवन का मूल आधार | Pranayam's basic foundation of life

December 16, 2023 0 Comments

 

pranayama
Pranayama
'प्राणायाम' प्राणवायु को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ऋषियों का मानना था कि प्रत्येक जीव के सांसो की संख्या निश्चित होती है। जिव यदि उस सांस को अव्यवस्थित रूप से वह व्यय करता है, तो वह 1 दिन अपनी जीवनी शक्ति गवाकर अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। यदि व प्राणायाम के द्वारा अपनी सांसो को नियंत्रित करके 'ध्यान' लगाए, तो ना केवल उसकी प्रत्येक सांस की अवधि लंबी हो जाती है, बल्कि वह इससे अपनी शारीरिक एवं मानसिक चेतना को बढ़ाकर अपने जीवन की निर्धारित सांसों की संख्या को बढ़ा भी सकता है।


इस सिद्धांत पर अनेक  ऋषियों द्वारा प्रयोग एवं अन्वेषण होते रहे हैं और यह भी खोज निकाला गया कि सांसो के प्रभाव से शरीर एवं जीवन शक्ति का नास समान रूप में ही होता है। प्राणायाम के द्वारा शरीर को सांसो के विनाशक प्रभाव से बचाया जा सकता है और कालजयी जीवन (इसका अर्थ अमर नहीं है, बल्कि दीर्घ जीवन है) प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि प्राचीन ऋषि-मुनि लंबे समय तक प्राणायाम के माध्यम से समाधि में चले जाते थे। उस समय उनकी सांस नहीं चलती थी, इसलिए शरीर काल के प्रभाव से अछूता रहता था।


प्राणायाम के माध्यम से ही सिद्ध योगी अपने सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से अलग करके अंतरिक्ष में विचरण किया करते थे।


पश्चिमी विज्ञान के सिद्धांतों से प्रभावित लोग सूक्ष्म शरीर की मान्यता का मजाक उड़ाते नजर आते हैं, किंतु यह शरीर प्रत्येक जीव में है और इसका स्वरूप पूर्णतया वैज्ञानिक है। भारतीय योग, तंत्र एवं तप के तमाम प्रयोगों में इस सूक्ष्म शरीर की रचना का प्रयोग किया जाता है।


"उदाहरण स्वरुप प्राणायाम की साधना का अभ्यास करने के पश्चात योगीगण इसकी सहायता से कुंडलिनी को जागृत करने का प्रयत्न करते हैं। इस कुंडलिनी का अस्तित्व सूक्ष्म शरीर में ही है। इसके चक्रों की रचना, आकृति और स्थान का जो विवरण योग शास्त्र में दिया गया है वैसी कोई भी रचना स्थूल के उस भाग में नहीं है"।


बहुत से लोग यह प्रश्न उठाते हैं कि जब सूक्ष्म शरीर को देखा नहीं जा सकता, तो उसके अस्तित्व पर कैसे विश्वास किया जाए? एक तो यह सिद्धांत ही अज्ञानता पूर्ण है कि जो भी इंद्रियों के द्वारा अनुमति में आता है, वही सत्य है। क्योंकि हमारी अनुभूति किसी शाश्वत मापदंड में नहीं बंधी हुई है। नित नए आविष्कार हो रहे हैं और उसके होने से पहले वह सिद्धांत हमारे ज्ञान में नहीं होता। इसीलिए यह दावा करना वज्र मूर्ख का कार्य है कि जो कुछ भी वह जानता है, संसार का सत्य वही तक है।


सूक्ष्म शरीर और उसकी ऊर्जा की तरंगों का अनुभव हम प्राणायाम के अभ्यास से कर सकते हैं। यदि हमने कुण्डलिनी पर 'ध्यान' लगाया तो 3 से 6 महीने के अंदर उसकी विलक्षण शक्ति का अनुभव होने लगता है। उसके प्रारंभिक चक्रों का भी अनुभव होने लगता है।

एलोवेरा सेवन करने के फायदे | Benefits of eating aloe vera

December 16, 2023 0 Comments

एलोवेरा के अनचाहे फायदे देखकर आप रह जाएंगे दंग। एलोवेरा हमारे शरीर के लिए फायदेमंद तो है ही साथ-साथ यह हमारे सुंदरता को भी निखारती है।  एलोवेरा में विटामिन ई, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन एंटी एजिंग होता है।


एलोवेरा को ग्वारपाठा भी कहा जाता है एलोवेरा में बहुत सारे विटामिन मिनरल्स और एंजाइम होते हैं यह हमारे हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी होता है एलोवेरा रोज सुबह पीने से खून की कमी में काफी मदद मिलता है और साथ ही  खून को साफ बनाता है ब्लड सरकुलेशन वी इंप्रूव होता है शरीर के पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है इससे बवासीर कब्ज एसिडिटी जड़ से खत्म हो जाती है ।

एलोवेरा के सेवन से सारे विषैले पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं, हमारे स्किन और हमारे बालों की ओवरऑल हेल्थ के लिए एलोवेरा जूस बहुत ही लाभदायक है। रोज सुबह खाली पेट 10 से 15 मिली ग्राम एलोवेरा जूस पीना चाहिए,  चेहरे की झुर्रियां आपको समय से पहले बूढ़ा बना देती है इससे बचने के लिए रोजाना सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस का सेवन करें ।

एलोवेरा जूस में एंटी बैक्टीरियल और एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होती है इसके सेवन से शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जल्दी से कोई बीमारी नहीं होती है।

 एलोवेरा सुंदरता को कैसे निखारती है ? अब यह जान लेते हैं।

1) क्लियर स्किन चाहते हैं तो एलोवेरा का उपयोग करें यह काला दाग धब्बे पिंपल्स को जड़ से हटाता है और चेहरों को सुंदर बनाता है।

2) आफ्टर शेव लोशन-सेविंग करने पर कुछ लोगों को दाने निकल आते हैं और वह इससे बहुत परेशान रहते हैं तो इस समय बिना कुछ सोचे एलोवेरा का यूज करें और अपने चेहरे से दाने को हटाए।

3) ग्लोइंग स्किन-हर लड़कियां चाहती है कि उसका चेहरा ग्लो करें एलोवेरा के उपयोग से आपका चेहरा अनचाहे ग्लो करने लगेंगे। तो इस प्रकार एलोवेरा के फायदे ले सकते है।

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तुलसी के औषधीय लाभ। Medicinal benefits of Basil

December 16, 2023 0 Comments

 

पवित्र तुलसी के स्वास्थ्य लाभ, जिन्हें तुलसी भी कहा जाता है, में मौखिक देखभाल, श्वसन संबंधी विकारों से राहत, साथ ही बुखार, अस्थमा, फेफड़ों के विकार, हृदय रोग और तनाव का उपचार शामिल है। पवित्र तुलसी, जिसका वैज्ञानिक नाम ओसीमियम अभयारण्य निस्संदेह सबसे अच्छा औषधीय जड़ी बूटियों में से एक है जिसे खोजा गया है। इसमें अंतहीन चमत्कारी और औषधीय मूल्य हैं और हजारों सालों से भारत में पूजा और अत्यधिक मूल्यवान है।

यहां तक कि तुलसी संयंत्र के नजदीक भी आपको कई संक्रमणों से बचा सकता है। पीने के पानी या भोजन में गिराए गए कुछ पत्ते भी रोगाणुओं को शुद्ध और मार सकते हैं। यहां तक कि इसे गंध भी या इसे एक बर्तन में लगाए रखने से पूरे परिवार को संक्रमण, खांसी, ठंड और अन्य वायरल संक्रमण से बचाया जा सकता है।

ये अनुप्रयोग अति अतिरंजित नहीं हैं। यह सुबह और शाम को दिन में दो बार पूजा करने, पानी के पानी और हल्की दीपक की पूजा करने के लिए भारत में एक पुरानी परंपरा रही है। माना जाता था कि यह अभी भी पूरे परिवार को बुराई से बचाने और अच्छी किस्मत लाने के लिए माना जाता है। प्राचीन काल से तुलसी के पत्ते सभी पूजा समारोहों का एक अनिवार्य हिस्सा भी रहे हैं। ये अभ्यास अंधविश्वास नहीं हैं क्योंकि उनके पास वास्तव में उनके पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक तर्क है। इस पौराणिक जड़ी बूटी के अति-कीटाणुनाशक और कीटाणुनाशक गुणों को ध्यान में रखते हुए, बुद्धिमान लोगों ने इन प्रथाओं को हर दिन इस पौधे के संपर्क में लाने के लिए तैयार किया ताकि वे दिन-प्रति-दिन संक्रमण से सुरक्षित रह सकें।

पवित्र तुलसी के स्वास्थ्य लाभ
निम्नलिखित अनुच्छेदों में, हम देखेंगे कि यह निश्चित रूप से पूजा करने के योग्य क्यों है। तुलसी के स्वास्थ्य लाभ हैं:

बुखार का इलाज
पवित्र तुलसी के चमत्कारी उपचार गुण मुख्य रूप से इसके आवश्यक तेलों और फाइटोन्यूट्रिएंट से आते हैं। पवित्र तुलसी एक उत्कृष्ट एंटीबायोटिक, कीटाणुनाशक, कवक, और कीटाणुशोधक एजेंट है और यह हमारे शरीर को जीवाणु, वायरल और कवक संक्रमण के सभी प्रकार से प्रभावी ढंग से सुरक्षित करता है। बुखार मुख्य रूप से प्रोटोजोआ (मलेरिया), बैक्टीरिया (टाइफोइड), वायरस (फ्लू), और यहां तक कि एलर्जी पदार्थ और कवक से संक्रमण के कारण होता है। बुखार वास्तव में खुद में एक बीमारी नहीं है। यह सिर्फ एक लक्षण है जो दर्शाता है कि हमारा शरीर कम दिखाई देने वाले संक्रमणों के खिलाफ लड़ रहा है। तुलसी के जबरदस्त कीटाणुशोधक, कीटाणुनाशक, और कवक की संपत्तियां ऊपर चर्चा की गई सभी रोगजनकों को नष्ट कर देती हैं और परिणामी बुखार को ठीक करती हैं। अगर किसी को बुखार से पीड़ित होता है तो यह तुलसी के पत्तों और फूलों का काढ़ा होने के लिए भारत में एक पुरानी प्रथा है।

श्वसन विकार का इलाज
तुलसी, श्वसन प्रणाली के वायरल, जीवाणु, और कवक संक्रमण के इलाज के साथ, इसके आवश्यक तेलों में कैंपेन, यूजीनॉल और सिनेओल जैसे घटकों की उपस्थिति के कारण भीड़ से चमत्कारी राहत प्रदान करता है। यह पुरानी और तीव्र दोनों ब्रोंकाइटिस समेत लगभग सभी श्वसन संबंधी विकारों को ठीक करने में बहुत प्रभावी है।


अस्थमा का इलाज करता है
तुलसी अस्थमा के इलाज में बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे भीड़ से राहत मिलती है और चिकनी सांस लेने में मदद मिलती है। फाइटोन्यूट्रिएंट्स और आवश्यक तेल, इसके अलावा अन्य खनिजों के साथ, अस्थमा के कुछ अंतर्निहित कारणों को भी ठीक करने में मदद करते हैं।


फेफड़ों के विकार रोकता है
तुलसी के आवश्यक तेलों में उपस्थित विटामिन सी, कैंपेन, यूजीनॉल और सिनेओल जैसे यौगिक न केवल फेफड़ों में संक्रमण का इलाज करते हैं बल्कि उनमें भीड़ को ठीक करते हैं। इसके अलावा, वे धूम्रपान, तपेदिक के कारण फेफड़ों के कारण होने वाले नुकसान को ठीक करने में प्रभावी पाए जाते हैं, और फेफड़ों के कैंसर को रोकते हैं। यह एंटीबायोटिक गुणों के कारण तपेदिक का इलाज करने में भी मदद करता है।

हृदय रोगों को रोकता है
पवित्र तुलसी में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जैसे यूजीनॉल, जो दिल को मुक्त कणों के हानिकारक प्रभाव से बचाते हैं। इसके अतिरिक्त, रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में यूजीनॉल बहुत फायदेमंद है।

तनाव कम करता है
होली बेसिल में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट, मुक्त कणों द्वारा किए गए नुकसान की मरम्मत के अलावा, इन ऑक्सीडेंटों के कारण होने वाले तनाव को भी कम करते हैं। वे नसों को शांत करते हैं, रक्तचाप कम करते हैं, सूजन को कम करते हैं, और इस प्रकार तनाव को कम करते हैं। तुलसी में पोटेशियम, सोडियम की जगह और तनावग्रस्त रक्त वाहिकाओं को ढीला करके रक्तचाप से संबंधित तनाव को भी कम कर देता है।

मुंह फ्रेशनर
तुलसी एक उत्कृष्ट मुंह फ्रेशनर और एक मौखिक कीटाणुनाशक है और इसकी ताजगी बहुत लंबे समय तक चलती है। पवित्र तुलसी मुंह में 99% से अधिक रोगाणुओं और बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है और यह प्रभाव पूरे दिन तक टिक सकता है। यह मुंह में अल्सर का इलाज भी करता है। अंत में, यह मौखिक कैंसर के विकास को रोकने के लिए जाना जाता है जो तंबाकू चबाने के कारण हो सकता है।


दाँतों की देखभाल
पवित्र तुलसी दांतों की रक्षा करते समय दंत गुहाओं, पट्टिका, टारटर और बुरी सांस के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। इसमें अस्थिर गुण भी होते हैं जो मसूड़ों को दांतों को कड़ा कर देते हैं, जिससे उन्हें गिरने से रोकते हैं। हालांकि, तुलसी में पारा जैसे कुछ यौगिक भी होते हैं, जिनमें समृद्ध जंतुनाशक गुण होते हैं जो दांतों के लिए हानिकारक हो सकते हैं यदि लंबे समय तक सीधे संपर्क में रखा जाता है। इसलिए, इन पत्तियों को चबाने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तव में पवित्र पुस्तकों और आयुर्वेदिक शिक्षाओं में चर्चा की जाती है जो इन पत्तियों को चबाने से उनकी पवित्रता को लुप्त करती है। हालांकि, अगर आप इसे चबाते हैं या इसके काढ़े का उपभोग नहीं करते हैं तो इसका कोई नुकसान नहीं होता है।

किडनी स्टोन्स रोकता है
तुलसी, एक डिटोक्सिफायर और हल्के मूत्रवर्धक होने से, शरीर में यूरिक एसिड स्तर को कम करने में मदद करता है, जो मुख्य अपराधी है जहां तक गुर्दे के पत्थरों का संबंध है। यह पेशाब की बढ़ती आवृत्ति के माध्यम से गुर्दे को साफ करने में भी मदद करता है। तुलसी आवश्यक तेल में एसिटिक एसिड और कुछ घटक पत्थरों के विघटन की सुविधा प्रदान करते हैं। अंत में, इसमें दर्द-हत्यारा प्रभाव पड़ता है और गुजरने वाले पत्थरों से होने वाले दर्द को सहन करने में मदद करता है।

त्वचा की देखभाल
त्वचा के रोगों के मामले में त्वचा के संक्रमित क्षेत्र पर अपने स्नान के पानी के साथ मिश्रित पवित्र तुलसी के एक काढ़े के साथ स्नान करने का प्रयास करें, इसके साथ अपना चेहरा धोएं, या त्वचा के संक्रमित क्षेत्र पर बस अपनी पत्तियों का पेस्ट लगाएं। आप केवल तुलसी पत्तियों का उपभोग कर सकते हैं और अभी भी अपनी त्वचा को सभी संक्रमणों से मुक्त रखने में कामयाब रहे हैं। शरीर पर पवित्र तुलसी के पत्तों या उसके निकाले गए तेल को रगड़ना मच्छरों और अन्य कीड़ों को दूर रखता है। यह किसी भी दुष्प्रभाव के बिना आंतरिक और बाहरी दोनों में त्वचा विकारों को ठीक करता है। यह संपत्ति मुख्य रूप से अपने आवश्यक तेलों से आती है, जो प्रकृति में अत्यधिक एंटीबायोटिक, कीटाणुशोधक, जीवाणुरोधी, और एंटीफंगल हैं। त्वचा पर बाहरी आवेदन त्वचा की सतह से अतिरिक्त तेल भी हटा देता है। इसमें कैंपेन एक सुखद और शीतलन प्रभाव देता है।


सिरदर्द से राहत मिलती है
एक माइग्रेन, साइनस दबाव, खांसी, और ठंड या उच्च रक्तचाप के कारण होने वाली सिरदर्द को प्रभावी रूप से एक तुलसी सेवा के उपयोग से नियंत्रित किया जा सकता है। पवित्र तुलसी में कैम्पेन, यूजीनॉल, सिनेोल, कारवाक्रोल, और मिथाइल-चाविकोल, उत्कृष्ट एनाल्जेसिक, शामक, विरोधी-संक्रामक और कीटाणुनाशक गुण हैं।

समयपूर्व उम्र बढ़ने से बचाता है
विटामिन सी और ए, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, और पवित्र तुलसी में आवश्यक तेल उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट हैं और शरीर में मुक्त कणों के कारण होने वाले लगभग सभी नुकसान से शरीर की रक्षा करते हैं, जो कि सेलुलर चयापचय के खतरनाक उपज हैं जो बीमारियों के व्यापक स्वार्थ के लिए जिम्मेदार हैं , कैंसर सहित। आयुर्वेद नामक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली में, इसे युवा शक्ति को बनाए रखने और समय से पहले उम्र बढ़ने से बचने के लिए एक टॉनिक माना जाता है।

तुलसी बूस्ट्स प्रतिरक्षा
पवित्र बेसिल प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के लिए इतना अच्छा है कि शब्दों में इसका वर्णन करना मुश्किल है। यह वायरस, बैक्टीरिया, कवक, और प्रोटोजोआ से लगभग सभी संक्रमणों के खिलाफ सुरक्षा करता है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि यह एचआईवी और कैंसरजन्य कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी सहायक है।

आंख की देखभाल
पानी में भिगोकर तुलसी की कुछ पत्तियों के साथ रोज़ाना अपनी आंखें धोएं और आप संयुग्मशोथ, फोड़े, और आंखों की कई अन्य समस्याओं से मुक्त हो जाएंगे जो वायरल, बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण के कारण होते हैं। यह आंख की सूजन को भी सूखता है और तनाव को कम करता है। नियमित खपत, अपने आवश्यक तेलों, विटामिन ए और विटामिन सी की उच्च एंटीऑक्सीडेंट सामग्री के कारण, मुक्त कणों, जैसे मोतियाबिंद, मैकुलर अपघटन, ग्लूकोमा, दृष्टि दोष, और नेत्र रोग द्वारा किए गए नुकसान से आपकी आंखों की रक्षा कर सकती है।

अन्य लाभ

यह आपके शरीर को विकिरण विषाक्तता से बचा सकता है और इस तरह की स्थिति से क्षति को भी ठीक कर सकता है। इसे सर्जरी के बाद जल्दी से घावों को ठीक करने में मदद करने के लिए और उन क्षेत्रों को संक्रमण से बचाने के लिए दिया जा सकता है। नियमित रूप से खपत होने पर यह पोक्स के खिलाफ एक टीका के रूप में कार्य करता है। यह एक anticarcinogenic है और लगभग सभी प्रकार के कैंसर और ट्यूमर को ठीक करने में प्रभावी पाया जाता है। एक उम्मीदवार होने के नाते पवित्र तुलसी के सबसे मूल्यवान गुणों में से एक है, जो इसे खांसी और ठंड को ठीक करने में बहुत ही कुशल बनाता है। यह श्रम दर्द को कम करने, रेबीज कीटाणुओं को नष्ट करने, गैस्ट्रोएंटेरिटिस, कोलेरा, खांसी, खांसी, मस्तिष्क, संधिशोथ, मतली, सेप्टिक, मूत्र और जननांग संक्रमण का इलाज, और पेट में कीड़े को नष्ट करने में फायदेमंद है। इसके अलावा, इसकी सूखे पत्तियों को अनाज के साथ मिश्रित किया जा सकता है ताकि एक कीट प्रतिरोधी के रूप में उपयोग किया जा सके।

शायद, आपको यह पता लगाना चाहिए कि यह आपके लिए कितना अद्भुत हो सकता है!