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Monday, 18 December 2023

आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें। Prana Mudra - How To Do Steps And Its Benefits

 आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें।]


Prana Mudra
Prana Mudra
आजकल आंखों की समस्या होना आम बात हो गई है। आजकल डिजिटल समय में लोग हमेशा मोबाइल, कंप्यूटर पर दिन-रात अपने जरूरी कामों में लगे रहते हैं, जिसके कारण आंखों में समस्या होना आम बात हो गई है। इस पोस्ट में आपको 'प्राण मुद्रा' के अद्भुत गुण के बारे में बताएंगे जिसको करने से आपको अद्भुत लाभकारी फायदे होंगे।


प्राण मुद्रा करने की विधि

प्राण मुद्रा में कनिष्ठा (छोटी अंगुली), अनामिका (तीसरी अंगुली) एवं अंगूठे का अग्रभाग को एक साथ मिलाना पड़ता है और बाकी दोनों अंगुलियों को सीधा रखिए और इस प्रकार आपके हाथो में प्राण मुद्रा का आकार बन जाएगा। 30 सेकंड तक इसी आकार में अपने हांथो की  अंगुलियों को रखे। प्राण मुद्रा 15 से 20 बार करे जिससे आपको काफी लाभ मिलेगा। ऊपर दिए हुए चित्र अनुसार आप अभ्यास कर सकते है।


प्राण मुद्रा के अद्भुत लाभ

इस मुद्रा के नाम से ही समझ सकते है कि ये मुद्रा प्राण दायी है। प्राण के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता। इस मुद्रा को करने से प्राणों की सोई हुई शक्ति वापस लौट आती है । शरीर और मन में अलग से एक सक्रात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। अगर आप आंखो के किसी भी समस्या से परेशान है तो इस मुद्रा को करने से आपको 1 महीना के अंदर आपको फर्क साफ महसूस होने लगेगा। इस मुद्रा को करने से आंखो में अद्भुत रोशनी बढ़ने लगती है और आप किसी भी नंबर का चस्मा क्यों ना पहनते हो, इस मुद्रा से एक महीने के अंदर चस्मा हटाने में मदद करता है। लगातार एक महीने तक इस मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी आंखों की रोशनी बढ़ जाती है। लंबे समय तक प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से उपवास में भी भूख नहीं लगती। अनिद्रा रोग में ज्ञान मुद्रा के साथ यह व्यायाम करने पर सुफल लाभ प्राप्त होता है।

दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ | Ten major yoga Mudra and its benefits

हम जानते है कि हमारा शरीर पाँच तत्व से मिलकर बना है। अग्नि, वायु, पानी, धरती और ईथर, जिसमे हमारी हांथो की अंगुलियाँ इसका प्रतिक है। मुद्रा योग एक प्रकार का हाथों का योग है जिसमे हम अपने अँगुलियो को आपस में जोड़ने से योग मुद्रा बनती है। जिसको करने से हम शरीर के चुम्बुकिये तरंगे को सक्रिये करते है । 


मुद्रा योग के द्वारा हम अपने शरीर को वात, पित और कफ को संतुलन बनाये रखते है। जब हमारा शरीर असंतुलित हो जाता है तब हमारे शरीर में वात या पित या फिर कफ का असंतुलित मना जाता है | मुद्रा योग से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके कारण हमारा शरीर संतुलन बनाये रखता है। 

इस पोस्ट में हम दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ के बारे में जानेंगे ।

1. शुक्राणुओं की संख्या | Sperm Count

अपने कलाई पर इस बिंदु को मालिश करके अपने शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा दें। | boost your sperm production by massaging this point on your wrist.

2. दमा । Asthma 

सांस लेने में सहायता करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to aid breathing

3. सर्दी । Colds 

साइनस से छुटकारा पाने के लिए बड़े पैर की उंगलियों पर इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point on the big toes to get rid sinuses.

4. माइग्रेन | Migraine

प्रत्येक उंगली की युक्तियों को मालिश करें । Massage the tips of each finger.

5.गठिया | Arthritis

जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस बिंदु को मालिश करें । Massage this points to relieve stiffness from joints.

6. उच्च रक्तचाप | Hypertension

रक्त प्रवाह को आराम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage at this point to relax the blood flow.


7.अनिद्रा | Insomnia

विश्राम को बढ़ावा देने और नींद को प्रेरित करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point to promote relaxation and induce sleep.


8.मासिक धर्म ऐंठन | Menstrual cramps

इस बिंदु को गर्भाशय में आराम करने और मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने के लिए मालिश करें । Massage this point to relax uterus and reduce pain during menstruation.

9. डिप्रेशन | Depression

सेरोटोनिन (खुशी हार्मोन) को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पैर की अंगुली के शीर्ष पर इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point on the top of each toe to promote serotonin(happiness hormones).

10. जी मिचलाना | Nausea

जी मिचलाना के लक्षणों को कम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to subside the symptoms of nausea.

Friday, 15 December 2023

ज्ञान मुद्रा करने के फायदे । Benefits of Gyan Mudra

 हमारा शरीर बहुत सारे कोशिकाओं से मिलकर बना हुआ है । हमारे शरीर के कोशिकाओं को सक्रिय होना बहुत जरूरी होता है हमारे शरीर में ऐसे-ऐसे पॉइंट्स हैं जहां पर प्रेशर देने से बहुत ज्यादा ही लाभ होता है | तो आइए जानते है ज्ञान मुद्रा के लाभ के बारे में ।


किसी भी मुद्रा को करने से पहले सावधानियों के बारे जान लेना बहुत उचित होता है नहीं तो लाभ के वजाय हानि हो सकती है तो आइए जान लेते है ज्ञान मुद्रा करने से पहले किन- किन सावधानियों को ध्यान में रखना है।

सावधानियां - जिन लोगो की वात की शिकयत रहती है उन लोगो को ज्ञान मुद्रा ज्यादा समय तक नहीं करनी चाहिए क्यों की लाभ के वजाय हानि हो सकती है। आप ज्यादा से ज्यादा 3 से 5 मिनट तक कर सकते है । आपको ज्यादा बेहतर परिणाम के लिए आप योगा प्रशिक्षक से सलाह ले सकते है या भीर उनकी देख रेख में करने से आपको बहुत अच्छा परिणाम  मिलता है।

ज्ञान मुद्रा कैसे करें  - ज्ञान मुद्रा मुद्रा अच्छा लाभ के लिए आप को पद्मासन, ब्रजासन अथवा सुखासन में से किसी भी एक आसन में बैठ कर तर्जनी के अगले हिस्से को अंगूठे के अगले हिस्से से मिलाने से ज्ञान मुद्रा का आकार बन जाती है। और बाकि के तीन अंगुलियां सीधी रहनी चाहिए और हाथ जांघो पर रहनी चाहिए ।


इस आसन को आप कही भी कर सकते घर पर, अपने छत पर या भीर खुले मैदान में या अपने बिस्तर पर भी आप इस मुद्रो को कर सकते है । ज्यादा अच्छा लाभ के लिए आप खुले जगह और सांत परिवेश में इस मुद्रा को करें ताकि ज्यादा से ज्यादा आपको  लाभ मिल सके।

ज्ञान मुद्रा करने के फायदे - ज्ञान मुद्रा करने से आपका समरण सकती बढ़ती है और ज्ञान बढ़ती है।
जब आप ज्ञान मुद्रा करते है तब आपके अँगुलियों के दोनों ओर की ग्रंथियां सक्रीय रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देती है। ज्ञान मुद्रा करने से मस्तिष्क तेज और स्मृति शक्ति बढ़ती है।

इस मुद्रा को करने से अनिंद्रा का नाश, स्वभाव में परिवर्तन, आध्यात्मिक शक्ति का विकास और क्रोध का नाश होता है। इस मुद्रा को करने से लकवा पीड़ित व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर आपके तंत्रिकाओं में सूजन है तो ज्ञान मुद्रा इसमें भी लाभप्रद होती है। यह मुद्रा अल्जाइमर रोग के लिए लाभदायक है। ज्ञान मुद्रा के नित्य अभ्यास से आपका मन प्रसन्न रहता है।

इस मुद्रा को नियमित अभ्यास किया जाए तो सभी तरह के मानसिक विकारों तथा नशे की आदतों से मुक्ति मिल जाती है। इस मुद्रा को करने से एकाग्रता को बढ़ाकर, अनिंद्रा हिस्टीरिया, गुस्सा और निराशा को दूर कर देती है। इस मुद्रा को करने से मस्तिष्क के स्नायु मजबूत होते हैं और सिरदर्द दूर होता है।

ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से अमाशयिक शक्ति बढ़ती है जिससे पाचन संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। ज्ञान मुद्रा को नित्य अभ्यास से आपका मस्तिष्क तेज और आपका स्मृति शक्ति बढ़ती है। यह मुद्रा मस्तिष्क पक्षाघात (लकवा) के लिए लाभदायक है।

Thursday, 14 December 2023

प्राण मुद्रा, लाभ, कैसे करें, अवधि और सावधानियां। Pran mudra, Benefits, How to do, Duration and precautions.

मुद्रा करने की विधि -  कनिष्ठा और अनामिका सबसे छोटी और उसके पास वाली अंगुली के दोनों सिरों को अंगूठे के सिरों से मिलाने से प्राण मुद्रा बनती है, और बाकी की दो उंगली सीधी रहती है, इस प्रकार हाथों के अंगुलियों को रखने से प्राण मुद्रा बन जाती है और उसे प्राण मुद्रा कहते हैं। 

प्राण मुद्रा करने से फायदे - प्राण मुद्रा करने से प्राण की लंबी आयु होती है, आप लोगों ने देखा होगा ऋषि मुनि को इस अवस्था में तपस्या करते हुए। प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी शारीरिक और मानसिक रोग शक्तिशाली बनता है |प्राण मुद्रा के अनेकों फायदे हैं।

1) आंखों के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग हमारा आंख। हमारे आंख के लिए प्राण मुद्रा सबसे खास है, यह हमारे आंखों की पावर को बढ़ाता है। 
2) हृदय के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - जो व्यक्ति हृदय के रोगों से ग्रस्त है, उसे प्राण मुद्रा जल्दी शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि प्राण मुद्रा ह्रदय के लिए रामबाण इलाज है।
3) लकवा रोगों के लिए प्राण मुद्रा के लाभ - जिस व्यक्ति को लकवा होने पर कमजोरी हो जाती है, उस स्थिति मैं प्राण मुद्रा करने से मनुष्य की शक्ति वापस आ जाती है। 
4) तेजस्वी बनाने में प्राण मुद्रा के लाभ - प्राण मुद्रा के लगातार अभ्यास से प्राण शक्ति की कमी को दूर करके मनुष्य को तेजस्वी बना देते हैं।
5) बेचैनी दूर करने में प्राण मुद्रा का लाभ - हर व्यक्ति कुछ ना कुछ कारणवश बेचैनी का शिकार हो जाता है। उस समय प्राण मुद्रा करने से बेचैनी दूर होती है और मन शांत हो जाता है और कठोरता भी दूर होती है। 

प्राण मुद्रा करने का सही समय - प्राण मुद्रा करने का कोई समय नहीं होता है इसे आप कभी भी कर सकते है लेकिन ज्यादा अच्छा परिणाम के लिए आप सुबह यानि प्रातः काल में कर सकते है।  आप इस मुद्रा को 16 मिनट के अंतराल से  दो बार कर सकते है। अगर अधिकतम समय सीमा की बात करें तो इस मुद्रा को 48 से 50 मिनट तक कर सकते है अच्छे परिणाम के लिए।

सावधानियां -  प्राण मुद्रा बहुत शक्तिशाली मुद्रा है इससे प्राण की शक्ति और ज्ञानेंद्रियों में जान आने लगती है जिसका उपयोग सही दिशा में होना बहुत जरूरी है । अगर यही सकती गलत कामों में होने लगे तो आपका मन के ऊपर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।