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Saturday, 30 December 2023

योग करने से पहले रखें इन बातों का ख्याल, नहीं तो उठानी पड़ सकती है भारी नुकसान।

December 30, 2023 0 Comments

 

योग वह कला है जिसको करने से आप अपने मन को  उस परम् शक्ति एवं परम् ज्ञान से जोड़ सकते है । जिसको आपको अनुभूति होती है। योग मानव भावनाओं को संतुलित करने और ताल में बनाने का एक साधन है । योग व्यक्ति के शरीर में रचनात्मक दृष्टि से काम करता है। जैसे मानसिक, भौतिकक, आत्मिक और आध्यात्मिक। योग का अर्थ होता है "जोड़ना" यानी "जोड़". योग हमारे व्यक्तिगत चेतना को आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ने का कार्य करता है।

asana
Asana



योग करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है जिससे योगासन का अधिक से अधिक लाभ मिल सके और अज्ञानता के कारण होने वाली भूलो से किसी भी दुष्परिणाम से बचा जा सके।


1) योगा करने से पहले या बाद में एकदम कुछ भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि योगा करने से फायदे कम, नुकसान ज्यादा उठानी पड़ सकती है। जो भी आप खाएं डेढ़-दो घंटे बाद ही खाएं। केवल एकमात्र आसन वज्रासन ही भोजन के बाद किया जा सकता है, इसके अलावा कोई भी आसन या योग भोजन के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि आपको बहुत ही मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। खाली पेट योगासन करना सर्वोत्तम माना गया है तो जब भी आप योगासन करें खाली पेट ही करें।

2) चाय या दूध पीने के तुरंत बाद भी कोई भी योगासन ना करें क्योंकि इससे आपके शरीर पर दुष्परिणाम हो सकता है।

3) योगासन स्नान करने के तुरंत बाद नहीं करनी चाहिए  क्योंकि स्नान के बाद शरीर में ब्लड प्रेशर ज्यादा ही उतेजित रहता जिससे आपके मस्तिष्क पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है।

4) स्त्रियों को गर्भावस्था तथा रजस्वला होने के समय भी आसनों को कभी नहीं करना चाहिए, इसका विपरीत परिणाम आपको उठानी पड़ सकती है।

5) जब आप अत्यंत क्रोध और अत्यंत सुख में हो तब भी योगासन  ना करे, ऐसे समय में आसन करने से लाभ के वजह हानि ज्यादा होगी। आसन करते समय मन में बुरे विचार एवं मानसिक तनाव को कभी ना लाए और इससे बचने की कोशश करें।

6) योग कभी भी जल्दी बाजी में ना करें जब आपके पास पूर्ण रूप से योगासन करने के लिए पर्याप्त समय हो तभी योगासन करें। योगासन को धीरे-धीरे विधि पूर्वक पूरा समय देकर ही संपन्न करें क्योंकि इससे आपको ज्यादा लाभ प्राप्त होता है नहीं तो आपको जल्दी बाजी में लाभ से ज्यादा हानि होगी।

7) योगासन करते समय हंसे या बोले नहीं। आसन करते समय हसने या बोलने से मसल पुल का खतरा होता है।

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Wednesday, 27 December 2023

योगा करें स्वस्थ रहें

December 27, 2023 0 Comments
योगाभ्यास में आसन शरीर के विभिन्न मुद्राओं में बनाई गई विशिष्ट मुद्रा को कहते हैं । योग साधना में आसनों का अभ्यास मांसपेशियों रक्त इंद्रियों रोमकूपों आदि के विकारों को दूर करने एवं शरीर क्रिया का स्वास्थ्य रहना एवं पेशियों का लचीला होना ध्यान की एकाग्रता मैं अत्यंत सहायक होता है।
स्वाभाविक है कि यदि इसे व्यायाम के रूप में अपनाया जाए तो सभी प्रकार के रोगों को दूर करने में सहायक होता है।


लेकिन यह सदा स्मरण रखें की 'योग साधना' का उद्देश्य उस चेतना की शुद्धि एवं शक्ति का विकास करना है जो शरीर ही नहीं मन का भी संचालक है। सभी प्रकार की बीमारियों की जड़ मन की विकृति है। हमारे मन में यदि निराशा है, तो हमारा रक्तचाप गिर जाएगा, पेट में कब्ज हो जाएगी, अपच की शिकायत हो जाएगी, गैस बनेगी,  सर के बाल झड़ेंगे, या सफेद होने लगेंगे,  चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाएंगी, आंखों के नीचे काली छाया उभर जाएगी।
इसी प्रकार क्रोध में हमारा रक्तचाप बढ़ जाता है। नेत्र के तंतु प्रभावित होते हैं। मस्तिष्क की नारियां फूलने-पिचकने लगती है। इससे इनकी स्वभाविक स्थिति में परिवर्तन हो जाता है । क्रोध से रक्त में विषाक्त तत्व उत्पन्न होते हैं । इससे रक्त दूषित होता है अनेक प्रकार की बीमारियां रक्त के दूषित होने से उसे अपनी गिरफ्त में ले लेती है।


यदि मन की शुद्धि नहीं हुई, तो शरीर में विषाक्त तत्व बनते रहेंगे। आप उसे व्यायाम के द्वारा ठेल कर बाहर निकालते रहेंगे। व्यर्थ ही जीवन भर श्रम करते रहना होगा । इसमें आपको मानसिक शांति, उत्साह, उल्लास, आदि केवल आसन के अभ्यास से नहीं मिल पाएगा । मस्तिष्क का क्षेत्र 'ध्यान' का है। ध्यान लगाकर ही आप शारीरिक एवं मानसिक स्वस्थता को प्राप्त कर सकते हैं। सांसारिक मामलों की सफलता में भी यह आपको सहायता देगा । 

Monday, 18 December 2023

दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ | Ten major yoga Mudra and its benefits

December 18, 2023 0 Comments

हम जानते है कि हमारा शरीर पाँच तत्व से मिलकर बना है। अग्नि, वायु, पानी, धरती और ईथर, जिसमे हमारी हांथो की अंगुलियाँ इसका प्रतिक है। मुद्रा योग एक प्रकार का हाथों का योग है जिसमे हम अपने अँगुलियो को आपस में जोड़ने से योग मुद्रा बनती है। जिसको करने से हम शरीर के चुम्बुकिये तरंगे को सक्रिये करते है । 


मुद्रा योग के द्वारा हम अपने शरीर को वात, पित और कफ को संतुलन बनाये रखते है। जब हमारा शरीर असंतुलित हो जाता है तब हमारे शरीर में वात या पित या फिर कफ का असंतुलित मना जाता है | मुद्रा योग से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके कारण हमारा शरीर संतुलन बनाये रखता है। 

इस पोस्ट में हम दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ के बारे में जानेंगे ।

1. शुक्राणुओं की संख्या | Sperm Count

अपने कलाई पर इस बिंदु को मालिश करके अपने शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा दें। | boost your sperm production by massaging this point on your wrist.

2. दमा । Asthma 

सांस लेने में सहायता करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to aid breathing

3. सर्दी । Colds 

साइनस से छुटकारा पाने के लिए बड़े पैर की उंगलियों पर इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point on the big toes to get rid sinuses.

4. माइग्रेन | Migraine

प्रत्येक उंगली की युक्तियों को मालिश करें । Massage the tips of each finger.

5.गठिया | Arthritis

जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस बिंदु को मालिश करें । Massage this points to relieve stiffness from joints.

6. उच्च रक्तचाप | Hypertension

रक्त प्रवाह को आराम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage at this point to relax the blood flow.


7.अनिद्रा | Insomnia

विश्राम को बढ़ावा देने और नींद को प्रेरित करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point to promote relaxation and induce sleep.


8.मासिक धर्म ऐंठन | Menstrual cramps

इस बिंदु को गर्भाशय में आराम करने और मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने के लिए मालिश करें । Massage this point to relax uterus and reduce pain during menstruation.

9. डिप्रेशन | Depression

सेरोटोनिन (खुशी हार्मोन) को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पैर की अंगुली के शीर्ष पर इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point on the top of each toe to promote serotonin(happiness hormones).

10. जी मिचलाना | Nausea

जी मिचलाना के लक्षणों को कम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to subside the symptoms of nausea.

Saturday, 16 December 2023

प्राणायाम जीवन का मूल आधार | Pranayam's basic foundation of life

December 16, 2023 0 Comments

 

pranayama
Pranayama
'प्राणायाम' प्राणवायु को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ऋषियों का मानना था कि प्रत्येक जीव के सांसो की संख्या निश्चित होती है। जिव यदि उस सांस को अव्यवस्थित रूप से वह व्यय करता है, तो वह 1 दिन अपनी जीवनी शक्ति गवाकर अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। यदि व प्राणायाम के द्वारा अपनी सांसो को नियंत्रित करके 'ध्यान' लगाए, तो ना केवल उसकी प्रत्येक सांस की अवधि लंबी हो जाती है, बल्कि वह इससे अपनी शारीरिक एवं मानसिक चेतना को बढ़ाकर अपने जीवन की निर्धारित सांसों की संख्या को बढ़ा भी सकता है।


इस सिद्धांत पर अनेक  ऋषियों द्वारा प्रयोग एवं अन्वेषण होते रहे हैं और यह भी खोज निकाला गया कि सांसो के प्रभाव से शरीर एवं जीवन शक्ति का नास समान रूप में ही होता है। प्राणायाम के द्वारा शरीर को सांसो के विनाशक प्रभाव से बचाया जा सकता है और कालजयी जीवन (इसका अर्थ अमर नहीं है, बल्कि दीर्घ जीवन है) प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि प्राचीन ऋषि-मुनि लंबे समय तक प्राणायाम के माध्यम से समाधि में चले जाते थे। उस समय उनकी सांस नहीं चलती थी, इसलिए शरीर काल के प्रभाव से अछूता रहता था।


प्राणायाम के माध्यम से ही सिद्ध योगी अपने सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से अलग करके अंतरिक्ष में विचरण किया करते थे।


पश्चिमी विज्ञान के सिद्धांतों से प्रभावित लोग सूक्ष्म शरीर की मान्यता का मजाक उड़ाते नजर आते हैं, किंतु यह शरीर प्रत्येक जीव में है और इसका स्वरूप पूर्णतया वैज्ञानिक है। भारतीय योग, तंत्र एवं तप के तमाम प्रयोगों में इस सूक्ष्म शरीर की रचना का प्रयोग किया जाता है।


"उदाहरण स्वरुप प्राणायाम की साधना का अभ्यास करने के पश्चात योगीगण इसकी सहायता से कुंडलिनी को जागृत करने का प्रयत्न करते हैं। इस कुंडलिनी का अस्तित्व सूक्ष्म शरीर में ही है। इसके चक्रों की रचना, आकृति और स्थान का जो विवरण योग शास्त्र में दिया गया है वैसी कोई भी रचना स्थूल के उस भाग में नहीं है"।


बहुत से लोग यह प्रश्न उठाते हैं कि जब सूक्ष्म शरीर को देखा नहीं जा सकता, तो उसके अस्तित्व पर कैसे विश्वास किया जाए? एक तो यह सिद्धांत ही अज्ञानता पूर्ण है कि जो भी इंद्रियों के द्वारा अनुमति में आता है, वही सत्य है। क्योंकि हमारी अनुभूति किसी शाश्वत मापदंड में नहीं बंधी हुई है। नित नए आविष्कार हो रहे हैं और उसके होने से पहले वह सिद्धांत हमारे ज्ञान में नहीं होता। इसीलिए यह दावा करना वज्र मूर्ख का कार्य है कि जो कुछ भी वह जानता है, संसार का सत्य वही तक है।


सूक्ष्म शरीर और उसकी ऊर्जा की तरंगों का अनुभव हम प्राणायाम के अभ्यास से कर सकते हैं। यदि हमने कुण्डलिनी पर 'ध्यान' लगाया तो 3 से 6 महीने के अंदर उसकी विलक्षण शक्ति का अनुभव होने लगता है। उसके प्रारंभिक चक्रों का भी अनुभव होने लगता है।

Friday, 15 December 2023

पद्मासन, पद्मासन करने की विधि और लाभ I How To Do The Padmasana And What Are Its Benefits

December 15, 2023 0 Comments

 


Padmasana

पद्मासन एक योग - साधना का एक विशिष्ट आसन है। इसमें शरीर की उन सभी पेशियों का व्यायाम होता है, जो प्रयोग में न आने के कारण दृढ़ हो गई होती हैं। इसके साथ ही यह मस्तिष्क में शुद्ध रक्त प्रवाहित करने की प्रक्रिया तेज कर देता है। यही कारण है कि ध्यान लगाने के लिए इस आसन को सर्वोत्तम माना जाता है।

पद्मासन करने से पहले सावधानियां - उत्तर की ओर मुंह करके ना बैठे। समतल भूमि पर आसन लगाएं। मोटे थुलथूले व्यक्ति को पहले शरीर को सुडौल बनाने और मोटापा दूर करने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए। यह आसन थोड़ा कठिन है। किसी काम में जल्दी बाजी ना करें । प्रत्येक पैर को मोड़ने का व्यास धीरे-धीरे करें।
रात में दोनों पैरों के गड्ढे पर सरसों के तेल की मालिश करें। पहले 5 सेकंड से प्रारंभ करके सामान्य साधक को इस आसन को 15 मिनट तक करना चाहिए।

पद्मासन करने की प्रयोग विधि - 'पद्म' का अर्थ कमल है। अनेक योगियों का कथन है कि इस आसन के पूरा होने पर शरीर की मुद्रा एक कमल जैसी होती है, इसीलिए इसे पद्मासन कहते हैं। यह भी अर्थ ठीक है, लेकिन वस्तुतः इसे पद्मासन इसीलिए कहते हैं इसमें बैठकर मनुष्य अपने चेतनारूपी कमल को विकसित करते हैं।

पद्मासन करने की विधि - भूमि पर कंबल या दरी को चारों परतों मैं मोड़ कर बिछा ले। उस पर दोनों टांगों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए। अब दाई टांग को पिंडली और पैरों से पकड़कर धीरे-धीरे घुटने पर से मोड़े। 90 डिग्री का कोण के बाद टांग को मोड़ने में कठिनाई होती है।

आप दाहिने पैर को गठ्ठे और पंजे को चित्र अनुसार पकड़े और दाहिना टांग को थोड़ा ऊपर उठाते अंदर की ओर खींचिए। इसके अभ्यास में भी समय लगता है। दाहिने पैर की एड़ी बॉई जॉघ की जड़ से लगाकर कस लें।

अब बॉई टॉग को घुटने से मोड़कर गठ्ठे को बाएं हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाइए। बाएं पैर की एड़ी को दॉई जॉघ की जड़ से सटा दीजिए। फिर ज्ञान मुद्रा में उंगलियों को करके घुटनों पर रखिए।

पद्मासन में ध्यान - पद्मासन की अवस्था मानसिक एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम समझी जाती है। इसमें 'ध्यान' लगाकर दार्शनिक, व्यावसायिक, राजनीतिक, पारिवारिक किसी भी जटिल समस्या का हल ढूंढा जा सकता है। सर्च केवल यह है कि आपको इस आसन में ध्यान को एकाग्र करने का पूर्ण अभ्यास हो।

त्राटक के अभ्यास में इसी आसन का प्रयोग किया जाता है त्राटक साधना की कई सोपान है। केवल किसी बिंदु पर ध्यान को एकाग्र करके ही अप्रत्याशित मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके पश्चात आंखें बंद करके अंधेरे में ज्योति-बिंदु को खोजने का अभ्यास किया जाता है। इसके सात सोपान हैं। इसके बाद इस ध्यानाभ्यास का प्रयोग कुंडलिनी को जागृत करने में किया जाता है।

पद्मासन करने के लाभ- यदि आप केवल पद्मासन लगाकर व्यायाम करते हैं और ध्यान नहीं लगाते तो, आपको वात रोग, पेट रोग, गठिया, कब्ज आदि रोगों में आशातीत लाभ होगा।

यदि इस आसन में ध्यान लगाते हैं, तो इसके असीमित लाभ हैं। ध्यान के एक उच्च स्तर पर आप में अलौकिक शक्तियों का समावेश हो सकता है। शरीर की सुघड़ता, कांति, दीर्घ यौवन सहज में ही प्राप्त होते हैं।