सारी जिन्दगी हम इस शरीर के लिएे भागते रहते है जो कि एक दिन अवश्यमेव छोड़ना पड़ेगा । हम यदि अभी भी यह समझ जायें कि हम शरीर नही है, शरीर तो एक दिन छोड़ना होगा । छोड़ेगा कौन ? मैं आत्मा, जो हमेशा से है हमेशा रहेगी।
यह मनुष्य जीवन मिला ही हमें इसीलिये है कि हम यह समझ सकें कि मैं हूँ कौन ?
हम (आत्मा) 84 लाख योनियों में जिस भी शरीर मे गये उसी शरीर को हमने मैं (मैं यह शरीर हुँ) मान लिया, और उसी के लिएे यह 4 चार काम करने लगा,
१ शरीर का पेट भरना ।
२ सोना ( निद्रा) ।
३ सन्तानोप्ति (Sex)
४ शरीर की रक्षा
इस मानव शरीर को पाकर भी क्या हम यही चार कार्य नहिं कर रहें है क्या यह सोचें ?
हमें यह मनुष्य जीवन मिला है अपनी आत्मा का पेट भरने के लिये क्या मैनें आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न किया नहि किया तो कब करुँगा, इस मानव तन के रहते रहते ही हम आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न कर सकते है, मानव शरीर छिन जाने के बाद नही, फिर पता नही कब यह मानव शरीर मिले ?
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