Friday, 29 December 2023

सिद्धासन करने की विधि और इसके लाभ | Siddhasana - Benefits and Steps of Siddhasana



यह आसन सिद्धों का आसन है । इस आसन में लंबे समय तक बैठकर सिद्धि प्राप्त की जाती है।


सिद्धासन करने से पहले सावधानियां - सिद्धासन उत्तर दिशा की ओर मुंह करके इस आसन को कभी ना करें।इस आसन को शुरुआत में 2 मिनट तक ही इसमें ध्यान लगाएं,  बाद में इसे बढ़ाते जाएं,  15 मिनट से अधिक इस आसन में बैठने के लिए त्राटक बिंदु को केंद्रित करने का कुशल अभ्यास आवश्यक है । 

सामान्य लोगों के लिए 15 मिनट से अधिक ''ध्यान" लगाना उचित नहीं होगा। मस्तिष्क की नसें विकृत हो सकती है।
इस आसन के अभ्यास के दिनों में गर्म या उत्तेजक पदार्थों का आहार पूर्ण रूप से वर्जित है और साथ-साथ आप नमक का भी प्रयोग अपने खाने में कम करें।

सिद्धासन करने का विधि  - किसी भी आसन करने से पहले आप किसी दरिया चटाई का इस्तेमाल करें। बिना चटाई या दरी के कोई भी आसन ना करें। भूमि पर बिछी दरी या चटाई पर दोनों टांगो को सामने की ओर फैला कर बैठ जाएं । अब आप अपनी बाँयी टांग को मोड़कर एड़ी को गुदा एवं अंडकोष (testicle)के बीच कसकर सटा लीजिए। अब तलवे एवं पंजे को दाएं जांघ से चिपका ले।

अब आप दायीं टांग को घुटने से मोड़कर एड़ी को ज्ञानेंद्रियां से ऊपर इस प्रकार कसकर सताएँ कि ज्ञानेंद्रियां पर दबाव ना पड़े।  इसका पंजा बॉयी टांग की पिंडली तथा जाँघ से मिला हुआ रहे । दोनों टखनों की हड्डियां एक- दूसरे पर हो । कमर, रीढ़, गर्दन आदि सीधी रखें। दोनों हाथों को नाभि के नीचे ब्रह्मांजलि की दिशा में रखें। और अपने सांसो को सामान्य रखें। यानी अपने सांसो को ना ही जोर-जोर से ले नहीं धीरे-धीरे, सांस हमेशा अपनी सामान्य गति में होना चाहिए।


सिद्धासन में ध्यान -  आंखों से नाक की लौ की ओर देखें । आपको ललाट के मध्य में दबाव का अनुभव पड़ेगा । इस दबाव को बनाए रखें, ध्यान एकांग्रचित कीजिए | इससे आपको स्मरण शक्ति का ज्यादा से ज्यादा विकास होगा। अगर आप इस आसन को लगातार करते हैं,  तो आपको स्मरण शक्ति का विकास होगा और आपको हमेशा के लिए आपको भूलने का बीमारी खत्म हो जाएगा।


सिद्धासन का लाभ - इस आसन से आपका हृदय की बीमारी ठीक होता है। इसके साथ साथ अगर आप का श्वास रोग से पीड़ित हैं तो यह आसन स्वास रोग को भी ठीक करता है। अगर आप किसी योन रोग से पीड़ित हैं तो यह आसन लगातार करने से आपके यौन रोग को भी ठीक करता है। अगर आप किसी पाचन-क्रिया से संबंधित किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो इस आसन को लगातार करने से आपके पाचन-क्रिया संबंधी सारे रोगों को ठीक करता है।

इसका वास्तविक लाभ मानसिक है। इसमें ध्यान लगाने से मानसिक शांति मिलती है । दृष्टि तीक्ष्ण होती है । त्राटक बिंदु में प्रकाश भरता है।  कहा जाता है कि भगवान शंकर ने इसी मुद्रा में ध्यान लगाकर अपने तीसरे नेत्र को महाशक्तिमान बनाया था। इसीलिए यह आसन चमत्कारिक शक्तियों को प्रदान करने वाला है त्राटक बिंदु के खुलने पर दृष्टि का भाव बाहरी संसार पर प्रभाव डालने लगता है। 

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.