Friday, 15 December 2023

पद्मासन, पद्मासन करने की विधि और लाभ I How To Do The Padmasana And What Are Its Benefits

December 15, 2023 0 Comments

 


Padmasana

पद्मासन एक योग - साधना का एक विशिष्ट आसन है। इसमें शरीर की उन सभी पेशियों का व्यायाम होता है, जो प्रयोग में न आने के कारण दृढ़ हो गई होती हैं। इसके साथ ही यह मस्तिष्क में शुद्ध रक्त प्रवाहित करने की प्रक्रिया तेज कर देता है। यही कारण है कि ध्यान लगाने के लिए इस आसन को सर्वोत्तम माना जाता है।

पद्मासन करने से पहले सावधानियां - उत्तर की ओर मुंह करके ना बैठे। समतल भूमि पर आसन लगाएं। मोटे थुलथूले व्यक्ति को पहले शरीर को सुडौल बनाने और मोटापा दूर करने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए। यह आसन थोड़ा कठिन है। किसी काम में जल्दी बाजी ना करें । प्रत्येक पैर को मोड़ने का व्यास धीरे-धीरे करें।
रात में दोनों पैरों के गड्ढे पर सरसों के तेल की मालिश करें। पहले 5 सेकंड से प्रारंभ करके सामान्य साधक को इस आसन को 15 मिनट तक करना चाहिए।

पद्मासन करने की प्रयोग विधि - 'पद्म' का अर्थ कमल है। अनेक योगियों का कथन है कि इस आसन के पूरा होने पर शरीर की मुद्रा एक कमल जैसी होती है, इसीलिए इसे पद्मासन कहते हैं। यह भी अर्थ ठीक है, लेकिन वस्तुतः इसे पद्मासन इसीलिए कहते हैं इसमें बैठकर मनुष्य अपने चेतनारूपी कमल को विकसित करते हैं।

पद्मासन करने की विधि - भूमि पर कंबल या दरी को चारों परतों मैं मोड़ कर बिछा ले। उस पर दोनों टांगों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए। अब दाई टांग को पिंडली और पैरों से पकड़कर धीरे-धीरे घुटने पर से मोड़े। 90 डिग्री का कोण के बाद टांग को मोड़ने में कठिनाई होती है।

आप दाहिने पैर को गठ्ठे और पंजे को चित्र अनुसार पकड़े और दाहिना टांग को थोड़ा ऊपर उठाते अंदर की ओर खींचिए। इसके अभ्यास में भी समय लगता है। दाहिने पैर की एड़ी बॉई जॉघ की जड़ से लगाकर कस लें।

अब बॉई टॉग को घुटने से मोड़कर गठ्ठे को बाएं हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाइए। बाएं पैर की एड़ी को दॉई जॉघ की जड़ से सटा दीजिए। फिर ज्ञान मुद्रा में उंगलियों को करके घुटनों पर रखिए।

पद्मासन में ध्यान - पद्मासन की अवस्था मानसिक एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम समझी जाती है। इसमें 'ध्यान' लगाकर दार्शनिक, व्यावसायिक, राजनीतिक, पारिवारिक किसी भी जटिल समस्या का हल ढूंढा जा सकता है। सर्च केवल यह है कि आपको इस आसन में ध्यान को एकाग्र करने का पूर्ण अभ्यास हो।

त्राटक के अभ्यास में इसी आसन का प्रयोग किया जाता है त्राटक साधना की कई सोपान है। केवल किसी बिंदु पर ध्यान को एकाग्र करके ही अप्रत्याशित मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके पश्चात आंखें बंद करके अंधेरे में ज्योति-बिंदु को खोजने का अभ्यास किया जाता है। इसके सात सोपान हैं। इसके बाद इस ध्यानाभ्यास का प्रयोग कुंडलिनी को जागृत करने में किया जाता है।

पद्मासन करने के लाभ- यदि आप केवल पद्मासन लगाकर व्यायाम करते हैं और ध्यान नहीं लगाते तो, आपको वात रोग, पेट रोग, गठिया, कब्ज आदि रोगों में आशातीत लाभ होगा।

यदि इस आसन में ध्यान लगाते हैं, तो इसके असीमित लाभ हैं। ध्यान के एक उच्च स्तर पर आप में अलौकिक शक्तियों का समावेश हो सकता है। शरीर की सुघड़ता, कांति, दीर्घ यौवन सहज में ही प्राप्त होते हैं।

ब्रह्मांजलि आसन करने की विधि और इसके लाभ। Brahmanjali asana, Benefits and Steps of Brahmanjali asana

December 15, 2023 0 Comments

 

Brahmanjali asana
 Brahmanjali asana

परिचय
  - ब्रह्मांजलि आसन सिद्धि प्राप्ति का एक सरल आसन है। ये आसन ज्यादा लोगो के बीच चर्चित नहीं है। ये आसन  ऋषिमुनियों या यौगिक सिद्ध पुरष ही इस आसन में ज्यादा बैठते है और सिद्धि प्राप्त करते है।


ब्रह्मांजलि आसन करने की विधि - सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएं। बाएं हाथ की हथेली को एड़ी के ऊपर ऐसे रखें कि वह नाभि से नीचे रहे। अब दाएं हाथ की हथेली को बाएं हथेली पर रखिए। इस प्रकार से आप ब्रह्मांजलि आसन में बैठ सकते है। ये आसन करने में बहुत ही सरल है ।


ब्रह्मांजलि आसन में ध्यान -  ब्रह्मांजलि की मुद्रा सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में बनाकर त्राटक बिंदी को केंद्रित करने का अभ्यास किया जाता है। ये आसन ध्यान करने के लिए बहुत ही खास है।


ब्रह्मांजलि आसन करने का लाभ - ब्रह्मांजलि एक मुद्रा मात्र आसन है । इसे विभिन्न आसनों में प्रयोग किया जाता है। इससे शरीर के चक्र का हथेलियों से मिलाप होता है और यह शक्ति सीधे मस्तिष्क को मिलती है।

ब्रह्मांजलि आसन बहुत ही सरल आसन है इस आसन को करने के लिए शरीर को ज्यादा मोड़ना नहीं पड़ता है।

यह आसन सभी के लिए उपयुक्त है चाहे बच्चे हो या बुढ़ें। सम्पूर्ण रोगों में यह आसन काफी मदद करता है। जिन लोगो का मन्न काफी चंचल होता है उन लोगों के लिए ये आसन ज्यादा लाभप्रद है।

ये आसन छात्रों को ज्यादा करना चाहिए क्यों की ये आसन करने से मन सांत होता है और पढ़ाई में ज्यादा मन अकाग्रित होता है।

ब्रह्मांजलि आसन करने से पहले सावधानियां - कठिन आसन प्राणायाम तथा सूक्ष्म योगिक क्रियाएं प्रारंभिक काल में किसी जानकार व्यक्ति के निर्देशन में ही करनी चाहिए अन्यथा लाभ के बजाय हानि उठानी पड़ सकती है। केवल एक मात्र आसन ब्रजासन ही भोजन के बाद भी किया जा सकता है अन्य सभी आसन भोजन के बाद करने वर्जित माने गए हैं ।

खाली पेट योगासन करना सर्वोत्तम है । योगासनों से पहले या पश्चात एकदम कुछ भी नहीं खाना चाहिए, जो भी खाएं डेढ़-दो घंटे के बाद ही खाए।

ब्रह्मांजलि आसन उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ना लगाएं। ब्रह्मांजलि आसन करते समय हथेलियों और बाहों को ढीला रखें।

Calpol (paracetamol)

December 15, 2023 0 Comments

 Calpol (paracetamol) 


Calpol contains the dynamic fixing paracetamol, a painkilling medication used to calm mellow to direct torment and fever - read on for guidance on its utilization, admonitions, and reactions.


What is Calpol used for? 

Calpol items contain kids' portions of paracetamol. Calpol can be given to youngsters for the accompanying reasons: 

Alleviating mellow to direct torment, for example, cerebral pain, toothache, getting teeth, ear infection or sore throat. Diminishing a high temperature (fever). Diminishing hurts, agonies, fever and general inconvenience related with colds and influenza or following youth inoculations. 

How does Calpol work?

Calpol contains the dynamic fixing paracetamol. 

Paracetamol is thought to calm torment by diminishing the generation of prostaglandins in the mind and spinal line. 

Prostaglandins are delivered by the body in light of damage and certain sicknesses. One of their activities is to sharpen nerve endings, with the goal that when that zone is invigorated it causes torment (probably to keep us from making further damage the region). As paracetamol lessens the generation of these nerve sharpening prostaglandins it is figured it might build our torment limit, so that despite the fact that the reason for the torment remains, we can feel it less. 

Paracetamol decreases fever by influencing a zone of the cerebrum that controls our body temperature (the hypothalamic warmth directing focus). 

What should I know before giving my child Calpol?

Distinctive arrangements of Calpol are reasonable for offspring of various ages. Ensure you utilize the right planning and portion for your kid. Calpol fastmelts and Calpol six or more suspension are not appropriate for youngsters under six years old. 

Calpol must not be given with whatever other medications that contain paracetamol, as this can without much of a stretch brings about surpassing the suggested portion of paracetamol. 

An overdose of paracetamol is perilous and fit for making genuine harm to the liver and kidneys. You ought to never surpass the portion expressed in the data pamphlet provided with the prescription. Get prompt therapeutic counsel in case of an overdose with Calpol, regardless of whether your kid appears to be well, in view of the danger of deferred, genuine liver harm. 

Who should not take Calpol?

Calpol newborn child suspension ought not to be given to babies under two months of age, except if endorsed by a specialist. 

Calpol six or more suspension and Calpol fastmelts are not appropriate for youngsters under six years old. 

Get guidance from your specialist or drug specialist before giving your youngster Calpol in the event that they have any liver or kidney issues. 

Calpol ought not to be utilized if your tyke is susceptible to any of its fixings. In the event that you feel your youngster has encountered an unfavorably susceptible response, quit utilizing Calpol and illuminate your specialist or drug specialist right away. 

Calpol fastmelts contain aspartame, which is a wellspring of phenylalanine. They ought not to be given to youngsters with an acquired issue of protein digestion called phenylketonuria. 

How do I give Calpol?

Calpol can be given either with or without nourishment. 

Continuously adhere to the directions given on the bundling of Calpol items in regards to the amount of the medication to give and how regularly to give it. This will rely upon the quality of the prescription and the age of your kid. 

Each portion of Calpol suspension ought to be estimated utilizing an estimating spoon or an oral syringe. Never utilize a conventional teaspoon to quantify a portion of paracetamol. This isn't precise and can prompt your kid being given close to nothing or a lot of prescription. 

Jugs of Calpol suspension ought to be shaken before estimating a portion. 

Calpol suspension sachets ought to be kneaded before opening. 

Calpol Fastmelts are tablets that soften on the tongue to frame a glue that can be gulped without a beverage, in spite of the fact that these tablets can likewise be scattered in a teaspoonful of water or milk if your kid inclines toward. 

Try not to give this prescription to your tyke for over three days without getting therapeutic counsel from your specialist or drug specialist. For youngsters under a half year, get medicinal exhortation following 24 hours use if their side effects continue. 

What are the possible side effects of Calpol?

Meds and their conceivable reactions can influence unique individuals in various ways. Coming up next are a portion of the reactions that are known to be related to paracetamol. Because a symptom is expressed here does not imply that all youngsters given Calpol will encounter that or any reaction. 

Unfavorably susceptible skin responses, for example, a rash (every once in a while). 

Calpol fastmelts contain mannitol, which may have a mellow diuretic impact. 

Peruse the handout that accompanies the prescription or converse with your specialist, medical attendant or drug specialist in the event that you need any more data about the conceivable symptoms of Calpol. In the event that you think your tyke has encountered a reaction, did you realize you can report this utilizing the yellow card site? 

Can I give Calpol with other medicines?

On the off chance that your youngster is as of now taking some other prescriptions, you ought to get exhortation from your drug specialist before giving them Calpol also. 

Try not to give your kid Calpol in a blend with different drugs that contain paracetamol, as this can without much of a stretch brings about surpassing the most extreme suggested day by day portion of paracetamol. Numerous cold and influenza cures and different painkillers contain paracetamol, so make certain to check the elements of some other drugs previously giving them in the blend with Calpol, or approach your drug specialist for exhortation. 

Cholestyramine decreases the assimilation of paracetamol from the gut. You ought to abstain from giving it inside an hour of paracetamol or the impact of the paracetamol will be diminished. 

Metoclopramide and domperidone may build the retention of paracetamol from the gut. 

Different meds containing paracetamol 

Alvedon suppositories. 
Anadin paracetamol. 
Disprol. 
Fennings youngsters' cooling powders. 
Hedex. 
Medinol. 
Panadol. 
Perfalgan imbuement. 

Paracetamol tablets, containers, caplets, solvent tablets, suspension, and suppositories are likewise generally accessible without brand names, ie as the conventional drug. 

The amount and quality of paracetamol provided in the holder or parcel will decide if it very well may be purchased just from drug stores, or from other retail outlets, for example, general stores and carports. 

Meds that contain a blend of paracetamol together with different meds are likewise broadly accessible, for instance, cold and influenza cures and different painkillers. 

NB. Paracetamol is known as acetaminophen in the India and USA and some different nations.

पश्चिमोत्तानासन कैसे करें और इसके लाभ क्या हैं। How To Do The Paschimottanasana And What Are Its Benefits in hindi.

December 15, 2023 0 Comments

आसन करने से पहले आपको कुछ सावधानियां के बारे में पता होना चाहिए । You must be aware of certain precautions before doing Paschimottanasana.


इस आसन का अभ्यास करने से पहले आपको अपना पेट को खाली करना जरुरी है।  इस आसन को करने के लिए आपको कम से कम चार से छह-घंटे पहले ही भोजन करें ताकि आपका भोजन का पाचन हो सके ताकि आसन करने में आसानी हो। इस आसन को करने के लिए सुबह का समय अच्छा होता है लेकिन अगर आपको सुबह में समय न मिले तो आप इस आसन को शाम के समय भी कर सकते है पर ध्यान रखें कि आपका पेट उस समय खाली हो। खाने के तुरंत बाद इस आसन को कभी नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंट (pregnant) महिला  इस आसन को भूल कर भी ना करे।

यह आसनो में सबसे श्रेष्ठ आसन है, इस आसन को करने में पहले  दिक्कत होगी पर धीरे-धीरे इस आसन पर नियंत्रण हो जाता है। इस आसन में अपने शरीर को धीरे-धीरे सामने के तरफ झुकाये और जितना हो सके उतना ही झुकये। इस आसन को नित्य करने से आपको 20 से 25 दिन में इस आसन पर नियंत्रण हो जाता है ।


पश्चिमोत्तानासन करने की प्रक्रिया |  How To Do The Paschimottanasana.


1) पश्चिमोत्तानासन करना बहुत ही आसान है। इस आसन को करने के लिए आप दंडासन में बैठ जाएँ। दंडासन में आप पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और पैर की अंगुलियां तनी हुई होनी चाहिए और दोनों हाथ 
बगल में सीधी जमीन पर होना चाहिए।

2) अब साँस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएँ और ऊपर की तरफ खिंची हुए होनी चाहिए।

3) अब साँस छोड़ते हुए, कूल्हों को धीरे-धीरे आगे की ओर  झुकाएं, आप की ठुड्डी पंजों की ओर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए घुटनो पर झुकने की बजाय अपना ध्यान पंजों की ओर बढ़ने पर केंद्रित करें।

4) अब अपने हाथों को पैरों पर रखें और धीरे-धीरे अपने हाथों को पैर के पंजों को पकड़ने की कोशिश करे अगर आप पैरो के पंजों को पकर कर आप जितना जाहे आप अपने शरीर को झुका सकते है या फिर आप ऐसा करते है तो आपको आगे झुकने में आसानी होगी।

5) अब साँस भरते हुए धीरे से सिर को उठाएँ ताकि रीढ़ की हड्डी में खीचाव पैदा हो सके।

6) अब साँस छोड़ते हुए हल्के से नाभि को घुटने की ओर ले जाएँ। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएँ और सिर को नीचे झुका ले और 20-60 सेकंड तक गहरी साँस ले। हाथों को सामने की ओर फैलाएँ।

7) अब साँस भरते हुए अपने हाथों के सहारे वापस आते हुए आराम से बैठ जाएँ। अब साँस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आएँ। इस प्रकार से आप नित्य इस आसन को अभ्यास करें।


पश्चिमोत्तानासन करने के लाभ। Benefits of doing paschimottanasana.

1) पश्चिमोत्तानासन से आध्यात्मिक विकाश होता है। मूलाधार पुष्ट होता हैं और कुण्डलिनी जागृत करने में सहायता प्रदान करती है । जिन साधकों की कुण्डलिनी जागृत पहले से हुई है उन्हें कुण्डलिनी ऊर्द्ध करने में बहुत ही उपयोगी हैं। 

2) जो लोग कमर, पसलियों और कंधों की जकड़न से परेशान रहते है ये आसान बहुत ही लाभप्रद है उनलोगों के लिए और हमेसा के लिए परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।

3) ये आसान सर्दी के समय करने से आप का शरीर गर्म रहता है और छोटे-छोटे वायरल फीवर या सर्दी-खासी जुखाम जैसे बीमारियो से छुटकारा मिल जाता है। और  ये आसन बहुत ही लाभदायक हैं। 

4)  इस आसन से शरीर की गैस सम्बन्धी समस्याएं हमेसा के लिए दूर हो जाती है।

5) इस आसन से पूरे शरीर में रक्त संचार व्यवस्था पूरी तरह ठीक हो जाता है।

6) इस आसन से शरीर की कमजोरी दूर होती हैं और शरीर सुदृढ़, स्फूर्तिदायक ( फुर्तीला ) और हमेशा स्वस्थ रहता है।

7)  आसान अधिक से अधिक पेट की चर्बी और नितम्बों की चर्बी कम करती है।

8) जो लोग स्वप्न दोष ( वीर्य दोष ) समस्या से जूझ रहे है उनलोगों के लिये ये आसन एक बहुत ही लाभकारी आसन है और  दोष को हमेसा के लिए दूर कर देता हैं। 

9) गुर्दे सम्बन्धी रोग में बहुत लाभकारी है। 

10) इस आसन से पाचन-क्रिया संबंधी सारे परेशानी हमेसा के लिए दूर हो जाती है। 

11) इस आसन को लगातार करने से निम्न शब्द सुनाई देने लगता है जिससे कुण्डलिनी जागृत का अनुभव होता है।

12) इस आसन में दो नाड़ी सूर्य नाड़ी और चंद्र नाड़ी या जिसका पर्यायवाची शब्द इड़ा और पिंगला नाड़ी है ये शुद्ध होती है। जिससे बुढ़ापे के समय कमर में होने वाली अकड़ से राहत मिलती है।

ज्ञान मुद्रा करने के फायदे । Benefits of Gyan Mudra

December 15, 2023 0 Comments

 हमारा शरीर बहुत सारे कोशिकाओं से मिलकर बना हुआ है । हमारे शरीर के कोशिकाओं को सक्रिय होना बहुत जरूरी होता है हमारे शरीर में ऐसे-ऐसे पॉइंट्स हैं जहां पर प्रेशर देने से बहुत ज्यादा ही लाभ होता है | तो आइए जानते है ज्ञान मुद्रा के लाभ के बारे में ।


किसी भी मुद्रा को करने से पहले सावधानियों के बारे जान लेना बहुत उचित होता है नहीं तो लाभ के वजाय हानि हो सकती है तो आइए जान लेते है ज्ञान मुद्रा करने से पहले किन- किन सावधानियों को ध्यान में रखना है।

सावधानियां - जिन लोगो की वात की शिकयत रहती है उन लोगो को ज्ञान मुद्रा ज्यादा समय तक नहीं करनी चाहिए क्यों की लाभ के वजाय हानि हो सकती है। आप ज्यादा से ज्यादा 3 से 5 मिनट तक कर सकते है । आपको ज्यादा बेहतर परिणाम के लिए आप योगा प्रशिक्षक से सलाह ले सकते है या भीर उनकी देख रेख में करने से आपको बहुत अच्छा परिणाम  मिलता है।

ज्ञान मुद्रा कैसे करें  - ज्ञान मुद्रा मुद्रा अच्छा लाभ के लिए आप को पद्मासन, ब्रजासन अथवा सुखासन में से किसी भी एक आसन में बैठ कर तर्जनी के अगले हिस्से को अंगूठे के अगले हिस्से से मिलाने से ज्ञान मुद्रा का आकार बन जाती है। और बाकि के तीन अंगुलियां सीधी रहनी चाहिए और हाथ जांघो पर रहनी चाहिए ।


इस आसन को आप कही भी कर सकते घर पर, अपने छत पर या भीर खुले मैदान में या अपने बिस्तर पर भी आप इस मुद्रो को कर सकते है । ज्यादा अच्छा लाभ के लिए आप खुले जगह और सांत परिवेश में इस मुद्रा को करें ताकि ज्यादा से ज्यादा आपको  लाभ मिल सके।

ज्ञान मुद्रा करने के फायदे - ज्ञान मुद्रा करने से आपका समरण सकती बढ़ती है और ज्ञान बढ़ती है।
जब आप ज्ञान मुद्रा करते है तब आपके अँगुलियों के दोनों ओर की ग्रंथियां सक्रीय रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देती है। ज्ञान मुद्रा करने से मस्तिष्क तेज और स्मृति शक्ति बढ़ती है।

इस मुद्रा को करने से अनिंद्रा का नाश, स्वभाव में परिवर्तन, आध्यात्मिक शक्ति का विकास और क्रोध का नाश होता है। इस मुद्रा को करने से लकवा पीड़ित व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर आपके तंत्रिकाओं में सूजन है तो ज्ञान मुद्रा इसमें भी लाभप्रद होती है। यह मुद्रा अल्जाइमर रोग के लिए लाभदायक है। ज्ञान मुद्रा के नित्य अभ्यास से आपका मन प्रसन्न रहता है।

इस मुद्रा को नियमित अभ्यास किया जाए तो सभी तरह के मानसिक विकारों तथा नशे की आदतों से मुक्ति मिल जाती है। इस मुद्रा को करने से एकाग्रता को बढ़ाकर, अनिंद्रा हिस्टीरिया, गुस्सा और निराशा को दूर कर देती है। इस मुद्रा को करने से मस्तिष्क के स्नायु मजबूत होते हैं और सिरदर्द दूर होता है।

ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से अमाशयिक शक्ति बढ़ती है जिससे पाचन संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। ज्ञान मुद्रा को नित्य अभ्यास से आपका मस्तिष्क तेज और आपका स्मृति शक्ति बढ़ती है। यह मुद्रा मस्तिष्क पक्षाघात (लकवा) के लिए लाभदायक है।

Thursday, 14 December 2023

प्राण मुद्रा, लाभ, कैसे करें, अवधि और सावधानियां। Pran mudra, Benefits, How to do, Duration and precautions.

December 14, 2023 0 Comments
मुद्रा करने की विधि -  कनिष्ठा और अनामिका सबसे छोटी और उसके पास वाली अंगुली के दोनों सिरों को अंगूठे के सिरों से मिलाने से प्राण मुद्रा बनती है, और बाकी की दो उंगली सीधी रहती है, इस प्रकार हाथों के अंगुलियों को रखने से प्राण मुद्रा बन जाती है और उसे प्राण मुद्रा कहते हैं। 

प्राण मुद्रा करने से फायदे - प्राण मुद्रा करने से प्राण की लंबी आयु होती है, आप लोगों ने देखा होगा ऋषि मुनि को इस अवस्था में तपस्या करते हुए। प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी शारीरिक और मानसिक रोग शक्तिशाली बनता है |प्राण मुद्रा के अनेकों फायदे हैं।

1) आंखों के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग हमारा आंख। हमारे आंख के लिए प्राण मुद्रा सबसे खास है, यह हमारे आंखों की पावर को बढ़ाता है। 
2) हृदय के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - जो व्यक्ति हृदय के रोगों से ग्रस्त है, उसे प्राण मुद्रा जल्दी शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि प्राण मुद्रा ह्रदय के लिए रामबाण इलाज है।
3) लकवा रोगों के लिए प्राण मुद्रा के लाभ - जिस व्यक्ति को लकवा होने पर कमजोरी हो जाती है, उस स्थिति मैं प्राण मुद्रा करने से मनुष्य की शक्ति वापस आ जाती है। 
4) तेजस्वी बनाने में प्राण मुद्रा के लाभ - प्राण मुद्रा के लगातार अभ्यास से प्राण शक्ति की कमी को दूर करके मनुष्य को तेजस्वी बना देते हैं।
5) बेचैनी दूर करने में प्राण मुद्रा का लाभ - हर व्यक्ति कुछ ना कुछ कारणवश बेचैनी का शिकार हो जाता है। उस समय प्राण मुद्रा करने से बेचैनी दूर होती है और मन शांत हो जाता है और कठोरता भी दूर होती है। 

प्राण मुद्रा करने का सही समय - प्राण मुद्रा करने का कोई समय नहीं होता है इसे आप कभी भी कर सकते है लेकिन ज्यादा अच्छा परिणाम के लिए आप सुबह यानि प्रातः काल में कर सकते है।  आप इस मुद्रा को 16 मिनट के अंतराल से  दो बार कर सकते है। अगर अधिकतम समय सीमा की बात करें तो इस मुद्रा को 48 से 50 मिनट तक कर सकते है अच्छे परिणाम के लिए।

सावधानियां -  प्राण मुद्रा बहुत शक्तिशाली मुद्रा है इससे प्राण की शक्ति और ज्ञानेंद्रियों में जान आने लगती है जिसका उपयोग सही दिशा में होना बहुत जरूरी है । अगर यही सकती गलत कामों में होने लगे तो आपका मन के ऊपर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। 

कपालभाती प्राणायाम करने के फायदे और विधि | Benefits and methods of doing Kapalabhati Pranayama

December 14, 2023 0 Comments
आज कल के आधुनिक समाज में मोटापा एक प्रकार का अभिशाप बन गया है, क्योकि आज कल टेक्नोलॉजी के समय में लोगो का श्रम बहुत ही कम हो गया है और लोग टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भर हो गए है। जिस कारन से आज का समाज शारीर से बहुत ही अलसी और बहुत सारे रोगो से ग्रसित है। शारीरिक श्रम ना होने के कारण लोगो का फैट बडा हुआ है और मोटापा से लोग परेशान है । अगर आप एक बार मोटा हो गए तो आपका शरीर विभिन प्रकार के रोगों का घर बन जाता है ।

आज कल विभिन तरीके से लोग मोटापा को कम करना चाहते है लोग मोटापा weight loss को कम करने के लिए हजारों रुपये खर्च कर देते है फिर भी उनको संतुष्ठ जनक लाभ नहीं मिलता है।

कपालभाती से आप आसानी से अपना weight loss वजन कम कर सकते है और साथ-साथ इस प्राणायाम से बहुत सारे अन्य लाभ भी ले सकते है अगर आप कपालभाती का नित्य अभ्यास करते है तो।

कपालभाती का परिचय - कपालभाती एक संस्कृत शब्द है । कपालभाती का मतलब होता है, कपाल का मतलब मस्तक या सिर और भाती का मतलब चमकने वाला और प्राणायाम का मतलब साँस लेने की प्रक्रिया। 

कपालभाती  एक शक्ति से परिपूर्ण यानि श्वांस के द्वरा किये जाने वाला प्राणायाम है जो आपका वज़न कम करने में मदद करता है और आपके पूरे शरीर को संतुलित करता है।

किसी भी प्राणायाम को करने से पहले उससे जुड़ी सावधानियों को जान लेना बहुत जरूरी होता है जिससे की आप को कोई हानि न हो सके।

कपालभाती करने से पहले कुछ सावधानियां -  अगर आपको बुखार, दस्त, अत्यधिक कमजोरी की स्थिति हो तो इसे कदापि न करें।

इस प्राणायाम को खाने के बाद 5 घंटे तक नहीं करना चाहिए नहीं तो आपको हानि पहुंच सकती है।

अगर आपको पेट के किसी अंग जैसे लीवर, पैंक्रियाज, प्लीहा, छोटी आंत, बड़ी आंत, गुर्दे, स्लिप डिस्क, कमर दर्द,  सूजन और अल्सर आदि शिकायतें हो तो यह प्राणायाम कभी ना करें ।

कपालभाती प्राणायाम धूल-धुआं, दुर्गंध बंद व गर्म वातावरण में कभी नहीं करना चाहिए।

अगर आपको हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और पेट में गैस आदि कि शिकायतें हो तो यह प्राणायाम धीरे-धीरे करना चाहिए 60 बार 1 मिनट में करना चाहिए ।

जल्दी पतला होने के चक्कर में लोग अनेक बार इस प्रणायाम को करते हैं जो बहुत ही हानिकारक है।

अगर आप को कब्ज की शिकायत हो तो यह प्राणायाम न करें, गुनगुने पानी में नींबू डालकर पेट साफ कर ले और फिर प्राणायाम को करें।

 इस प्राणायाम को मासिक चक्र के दौरान और गर्भावस्था के समय इसे कभी न करें।



कपालभाती प्राणायाम करने की विधि - सबसे पहले एक साफ और खुले स्थान पर चादर को बिछाकर आराम से बैठ जाइए।

आप किसी एक आसन सिद्धासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाइए‌ और शरीर बिल्कुल ढीला होना चाहिए। बैठने के बाद अपने पेट को भी ढीला छोड़ दें।

आपके रीड की हड्डी एकदम सीधी होनी चाहिए और शरीर बिल्कुल ढीला होना चाहिए।

अब अपने नाक से सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते रहे जब जब आप अपनी सांसो को बाहर छोड़े ठीक उसी समय अपने पेट को अंदर की ओर खींचे।

श्वांस अंदर लेने की जरूरत नहीं है, इस क्रिया में श्वांस स्वत: ही अंदर लिया जाता है।

आप लगातार जितने समय तक आराम से कर सकते हैं तब तक नाक से सांस को बाहर छोड़ते रहें और पेट को अंदर कमर तक खींचने की क्रिया को करते रहे ध्यान रहे कि यह क्रिया आराम से की जानी चाहिए और आपका पेट अंदर की तरफ नाभि को केंद्र मानकर जाना चाहिए।

इस प्राणायाम को शुरुआत में 10 से 15 बार और धीरे-धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 75 बार तक इस क्रिया को किया जा सकता है।

आप चाहे तो बीच में कुछ समय तक आराम कर सकते हैं और फिर इस क्रिया को दोबारा कर सकते हैं।

कपालभाती प्राणायाम के फायदे -  कपालभाती करने से शरीर और मन के सारे नेगेटिव थॉट्स मिट जाते हैं।

कपालभाति को निरंतर अभ्यास करने से वजन कम करने में सहायता मिलती है और साथ में पेट के आस-पास जमी हुई चर्बी कम होती है पेट की अतिरिक्त बढ़ती हुई चर्बी के लिए यह प्रणाम बहुत ही लाभदायक है।

कपालभाति करने से पसीना बहुत ज्यादा आता है जिस कारण शरीर स्वस्थ रहता है।

यह आपके कमर के आकार को फिर से सामान्य स्थिति में लाने में मदद करता है।

कपालभाती प्रणायाम आपकी याददाश्त को तेज करता है।

चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे का कालापन दूर करने में काफी मदद करता है और चेहरे पर दोबारा चमक लौटाता है।

यह प्रणब गैस और कब्ज की परेशानी को दूर करने में बहुत ही लाभदायक होता है।

यह शरीर को डिटॉक्स करता है।

कपालभाति करने से बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है।

कपालभाति प्राणायाम को करने से रक्त धमनी के कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है

इस प्रणाम को करने से आपकी श्वास नली की सफाई अच्छे से हो जाती है।