Friday, 15 December 2023

पश्चिमोत्तानासन कैसे करें और इसके लाभ क्या हैं। How To Do The Paschimottanasana And What Are Its Benefits in hindi.

आसन करने से पहले आपको कुछ सावधानियां के बारे में पता होना चाहिए । You must be aware of certain precautions before doing Paschimottanasana.


इस आसन का अभ्यास करने से पहले आपको अपना पेट को खाली करना जरुरी है।  इस आसन को करने के लिए आपको कम से कम चार से छह-घंटे पहले ही भोजन करें ताकि आपका भोजन का पाचन हो सके ताकि आसन करने में आसानी हो। इस आसन को करने के लिए सुबह का समय अच्छा होता है लेकिन अगर आपको सुबह में समय न मिले तो आप इस आसन को शाम के समय भी कर सकते है पर ध्यान रखें कि आपका पेट उस समय खाली हो। खाने के तुरंत बाद इस आसन को कभी नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंट (pregnant) महिला  इस आसन को भूल कर भी ना करे।

यह आसनो में सबसे श्रेष्ठ आसन है, इस आसन को करने में पहले  दिक्कत होगी पर धीरे-धीरे इस आसन पर नियंत्रण हो जाता है। इस आसन में अपने शरीर को धीरे-धीरे सामने के तरफ झुकाये और जितना हो सके उतना ही झुकये। इस आसन को नित्य करने से आपको 20 से 25 दिन में इस आसन पर नियंत्रण हो जाता है ।


पश्चिमोत्तानासन करने की प्रक्रिया |  How To Do The Paschimottanasana.


1) पश्चिमोत्तानासन करना बहुत ही आसान है। इस आसन को करने के लिए आप दंडासन में बैठ जाएँ। दंडासन में आप पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और पैर की अंगुलियां तनी हुई होनी चाहिए और दोनों हाथ 
बगल में सीधी जमीन पर होना चाहिए।

2) अब साँस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएँ और ऊपर की तरफ खिंची हुए होनी चाहिए।

3) अब साँस छोड़ते हुए, कूल्हों को धीरे-धीरे आगे की ओर  झुकाएं, आप की ठुड्डी पंजों की ओर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए घुटनो पर झुकने की बजाय अपना ध्यान पंजों की ओर बढ़ने पर केंद्रित करें।

4) अब अपने हाथों को पैरों पर रखें और धीरे-धीरे अपने हाथों को पैर के पंजों को पकड़ने की कोशिश करे अगर आप पैरो के पंजों को पकर कर आप जितना जाहे आप अपने शरीर को झुका सकते है या फिर आप ऐसा करते है तो आपको आगे झुकने में आसानी होगी।

5) अब साँस भरते हुए धीरे से सिर को उठाएँ ताकि रीढ़ की हड्डी में खीचाव पैदा हो सके।

6) अब साँस छोड़ते हुए हल्के से नाभि को घुटने की ओर ले जाएँ। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएँ और सिर को नीचे झुका ले और 20-60 सेकंड तक गहरी साँस ले। हाथों को सामने की ओर फैलाएँ।

7) अब साँस भरते हुए अपने हाथों के सहारे वापस आते हुए आराम से बैठ जाएँ। अब साँस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आएँ। इस प्रकार से आप नित्य इस आसन को अभ्यास करें।


पश्चिमोत्तानासन करने के लाभ। Benefits of doing paschimottanasana.

1) पश्चिमोत्तानासन से आध्यात्मिक विकाश होता है। मूलाधार पुष्ट होता हैं और कुण्डलिनी जागृत करने में सहायता प्रदान करती है । जिन साधकों की कुण्डलिनी जागृत पहले से हुई है उन्हें कुण्डलिनी ऊर्द्ध करने में बहुत ही उपयोगी हैं। 

2) जो लोग कमर, पसलियों और कंधों की जकड़न से परेशान रहते है ये आसान बहुत ही लाभप्रद है उनलोगों के लिए और हमेसा के लिए परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।

3) ये आसान सर्दी के समय करने से आप का शरीर गर्म रहता है और छोटे-छोटे वायरल फीवर या सर्दी-खासी जुखाम जैसे बीमारियो से छुटकारा मिल जाता है। और  ये आसन बहुत ही लाभदायक हैं। 

4)  इस आसन से शरीर की गैस सम्बन्धी समस्याएं हमेसा के लिए दूर हो जाती है।

5) इस आसन से पूरे शरीर में रक्त संचार व्यवस्था पूरी तरह ठीक हो जाता है।

6) इस आसन से शरीर की कमजोरी दूर होती हैं और शरीर सुदृढ़, स्फूर्तिदायक ( फुर्तीला ) और हमेशा स्वस्थ रहता है।

7)  आसान अधिक से अधिक पेट की चर्बी और नितम्बों की चर्बी कम करती है।

8) जो लोग स्वप्न दोष ( वीर्य दोष ) समस्या से जूझ रहे है उनलोगों के लिये ये आसन एक बहुत ही लाभकारी आसन है और  दोष को हमेसा के लिए दूर कर देता हैं। 

9) गुर्दे सम्बन्धी रोग में बहुत लाभकारी है। 

10) इस आसन से पाचन-क्रिया संबंधी सारे परेशानी हमेसा के लिए दूर हो जाती है। 

11) इस आसन को लगातार करने से निम्न शब्द सुनाई देने लगता है जिससे कुण्डलिनी जागृत का अनुभव होता है।

12) इस आसन में दो नाड़ी सूर्य नाड़ी और चंद्र नाड़ी या जिसका पर्यायवाची शब्द इड़ा और पिंगला नाड़ी है ये शुद्ध होती है। जिससे बुढ़ापे के समय कमर में होने वाली अकड़ से राहत मिलती है।

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