Thursday, 14 December 2023

प्राण मुद्रा, लाभ, कैसे करें, अवधि और सावधानियां। Pran mudra, Benefits, How to do, Duration and precautions.

मुद्रा करने की विधि -  कनिष्ठा और अनामिका सबसे छोटी और उसके पास वाली अंगुली के दोनों सिरों को अंगूठे के सिरों से मिलाने से प्राण मुद्रा बनती है, और बाकी की दो उंगली सीधी रहती है, इस प्रकार हाथों के अंगुलियों को रखने से प्राण मुद्रा बन जाती है और उसे प्राण मुद्रा कहते हैं। 

प्राण मुद्रा करने से फायदे - प्राण मुद्रा करने से प्राण की लंबी आयु होती है, आप लोगों ने देखा होगा ऋषि मुनि को इस अवस्था में तपस्या करते हुए। प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी शारीरिक और मानसिक रोग शक्तिशाली बनता है |प्राण मुद्रा के अनेकों फायदे हैं।

1) आंखों के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग हमारा आंख। हमारे आंख के लिए प्राण मुद्रा सबसे खास है, यह हमारे आंखों की पावर को बढ़ाता है। 
2) हृदय के लिए प्राण मुद्रा का लाभ - जो व्यक्ति हृदय के रोगों से ग्रस्त है, उसे प्राण मुद्रा जल्दी शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि प्राण मुद्रा ह्रदय के लिए रामबाण इलाज है।
3) लकवा रोगों के लिए प्राण मुद्रा के लाभ - जिस व्यक्ति को लकवा होने पर कमजोरी हो जाती है, उस स्थिति मैं प्राण मुद्रा करने से मनुष्य की शक्ति वापस आ जाती है। 
4) तेजस्वी बनाने में प्राण मुद्रा के लाभ - प्राण मुद्रा के लगातार अभ्यास से प्राण शक्ति की कमी को दूर करके मनुष्य को तेजस्वी बना देते हैं।
5) बेचैनी दूर करने में प्राण मुद्रा का लाभ - हर व्यक्ति कुछ ना कुछ कारणवश बेचैनी का शिकार हो जाता है। उस समय प्राण मुद्रा करने से बेचैनी दूर होती है और मन शांत हो जाता है और कठोरता भी दूर होती है। 

प्राण मुद्रा करने का सही समय - प्राण मुद्रा करने का कोई समय नहीं होता है इसे आप कभी भी कर सकते है लेकिन ज्यादा अच्छा परिणाम के लिए आप सुबह यानि प्रातः काल में कर सकते है।  आप इस मुद्रा को 16 मिनट के अंतराल से  दो बार कर सकते है। अगर अधिकतम समय सीमा की बात करें तो इस मुद्रा को 48 से 50 मिनट तक कर सकते है अच्छे परिणाम के लिए।

सावधानियां -  प्राण मुद्रा बहुत शक्तिशाली मुद्रा है इससे प्राण की शक्ति और ज्ञानेंद्रियों में जान आने लगती है जिसका उपयोग सही दिशा में होना बहुत जरूरी है । अगर यही सकती गलत कामों में होने लगे तो आपका मन के ऊपर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। 

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