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Brahmanjali asana |
परिचय - ब्रह्मांजलि आसन सिद्धि प्राप्ति का एक सरल आसन है। ये आसन ज्यादा लोगो के बीच चर्चित नहीं है। ये आसन ऋषिमुनियों या यौगिक सिद्ध पुरष ही इस आसन में ज्यादा बैठते है और सिद्धि प्राप्त करते है।
ब्रह्मांजलि आसन करने की विधि - सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएं। बाएं हाथ की हथेली को एड़ी के ऊपर ऐसे रखें कि वह नाभि से नीचे रहे। अब दाएं हाथ की हथेली को बाएं हथेली पर रखिए। इस प्रकार से आप ब्रह्मांजलि आसन में बैठ सकते है। ये आसन करने में बहुत ही सरल है ।
ब्रह्मांजलि आसन में ध्यान - ब्रह्मांजलि की मुद्रा सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में बनाकर त्राटक बिंदी को केंद्रित करने का अभ्यास किया जाता है। ये आसन ध्यान करने के लिए बहुत ही खास है।
ब्रह्मांजलि आसन करने का लाभ - ब्रह्मांजलि एक मुद्रा मात्र आसन है । इसे विभिन्न आसनों में प्रयोग किया जाता है। इससे शरीर के चक्र का हथेलियों से मिलाप होता है और यह शक्ति सीधे मस्तिष्क को मिलती है।
ब्रह्मांजलि आसन बहुत ही सरल आसन है इस आसन को करने के लिए शरीर को ज्यादा मोड़ना नहीं पड़ता है।
यह आसन सभी के लिए उपयुक्त है चाहे बच्चे हो या बुढ़ें। सम्पूर्ण रोगों में यह आसन काफी मदद करता है। जिन लोगो का मन्न काफी चंचल होता है उन लोगों के लिए ये आसन ज्यादा लाभप्रद है।
ये आसन छात्रों को ज्यादा करना चाहिए क्यों की ये आसन करने से मन सांत होता है और पढ़ाई में ज्यादा मन अकाग्रित होता है।
ब्रह्मांजलि आसन करने से पहले सावधानियां - कठिन आसन प्राणायाम तथा सूक्ष्म योगिक क्रियाएं प्रारंभिक काल में किसी जानकार व्यक्ति के निर्देशन में ही करनी चाहिए अन्यथा लाभ के बजाय हानि उठानी पड़ सकती है। केवल एक मात्र आसन ब्रजासन ही भोजन के बाद भी किया जा सकता है अन्य सभी आसन भोजन के बाद करने वर्जित माने गए हैं ।
खाली पेट योगासन करना सर्वोत्तम है । योगासनों से पहले या पश्चात एकदम कुछ भी नहीं खाना चाहिए, जो भी खाएं डेढ़-दो घंटे के बाद ही खाए।
ब्रह्मांजलि आसन उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ना लगाएं। ब्रह्मांजलि आसन करते समय हथेलियों और बाहों को ढीला रखें।
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