हमारा शरीर बहुत सारे कोशिकाओं से मिलकर बना हुआ है । हमारे शरीर के कोशिकाओं को सक्रिय होना बहुत जरूरी होता है हमारे शरीर में ऐसे-ऐसे पॉइंट्स हैं जहां पर प्रेशर देने से बहुत ज्यादा ही लाभ होता है | तो आइए जानते है ज्ञान मुद्रा के लाभ के बारे में ।
किसी भी मुद्रा को करने से पहले सावधानियों के बारे जान लेना बहुत उचित होता है नहीं तो लाभ के वजाय हानि हो सकती है तो आइए जान लेते है ज्ञान मुद्रा करने से पहले किन- किन सावधानियों को ध्यान में रखना है।
सावधानियां - जिन लोगो की वात की शिकयत रहती है उन लोगो को ज्ञान मुद्रा ज्यादा समय तक नहीं करनी चाहिए क्यों की लाभ के वजाय हानि हो सकती है। आप ज्यादा से ज्यादा 3 से 5 मिनट तक कर सकते है । आपको ज्यादा बेहतर परिणाम के लिए आप योगा प्रशिक्षक से सलाह ले सकते है या भीर उनकी देख रेख में करने से आपको बहुत अच्छा परिणाम मिलता है।
ज्ञान मुद्रा कैसे करें - ज्ञान मुद्रा मुद्रा अच्छा लाभ के लिए आप को पद्मासन, ब्रजासन अथवा सुखासन में से किसी भी एक आसन में बैठ कर तर्जनी के अगले हिस्से को अंगूठे के अगले हिस्से से मिलाने से ज्ञान मुद्रा का आकार बन जाती है। और बाकि के तीन अंगुलियां सीधी रहनी चाहिए और हाथ जांघो पर रहनी चाहिए ।
इस आसन को आप कही भी कर सकते घर पर, अपने छत पर या भीर खुले मैदान में या अपने बिस्तर पर भी आप इस मुद्रो को कर सकते है । ज्यादा अच्छा लाभ के लिए आप खुले जगह और सांत परिवेश में इस मुद्रा को करें ताकि ज्यादा से ज्यादा आपको लाभ मिल सके।
ज्ञान मुद्रा करने के फायदे - ज्ञान मुद्रा करने से आपका समरण सकती बढ़ती है और ज्ञान बढ़ती है।
जब आप ज्ञान मुद्रा करते है तब आपके अँगुलियों के दोनों ओर की ग्रंथियां सक्रीय रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देती है। ज्ञान मुद्रा करने से मस्तिष्क तेज और स्मृति शक्ति बढ़ती है।
इस मुद्रा को करने से अनिंद्रा का नाश, स्वभाव में परिवर्तन, आध्यात्मिक शक्ति का विकास और क्रोध का नाश होता है। इस मुद्रा को करने से लकवा पीड़ित व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर आपके तंत्रिकाओं में सूजन है तो ज्ञान मुद्रा इसमें भी लाभप्रद होती है। यह मुद्रा अल्जाइमर रोग के लिए लाभदायक है। ज्ञान मुद्रा के नित्य अभ्यास से आपका मन प्रसन्न रहता है।
इस मुद्रा को करने से अनिंद्रा का नाश, स्वभाव में परिवर्तन, आध्यात्मिक शक्ति का विकास और क्रोध का नाश होता है। इस मुद्रा को करने से लकवा पीड़ित व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर आपके तंत्रिकाओं में सूजन है तो ज्ञान मुद्रा इसमें भी लाभप्रद होती है। यह मुद्रा अल्जाइमर रोग के लिए लाभदायक है। ज्ञान मुद्रा के नित्य अभ्यास से आपका मन प्रसन्न रहता है।
इस मुद्रा को नियमित अभ्यास किया जाए तो सभी तरह के मानसिक विकारों तथा नशे की आदतों से मुक्ति मिल जाती है। इस मुद्रा को करने से एकाग्रता को बढ़ाकर, अनिंद्रा हिस्टीरिया, गुस्सा और निराशा को दूर कर देती है। इस मुद्रा को करने से मस्तिष्क के स्नायु मजबूत होते हैं और सिरदर्द दूर होता है।
ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से अमाशयिक शक्ति बढ़ती है जिससे पाचन संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। ज्ञान मुद्रा को नित्य अभ्यास से आपका मस्तिष्क तेज और आपका स्मृति शक्ति बढ़ती है। यह मुद्रा मस्तिष्क पक्षाघात (लकवा) के लिए लाभदायक है।
ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से अमाशयिक शक्ति बढ़ती है जिससे पाचन संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। ज्ञान मुद्रा को नित्य अभ्यास से आपका मस्तिष्क तेज और आपका स्मृति शक्ति बढ़ती है। यह मुद्रा मस्तिष्क पक्षाघात (लकवा) के लिए लाभदायक है।

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