आज कल के आधुनिक समाज में मोटापा एक प्रकार का अभिशाप बन गया है, क्योकि आज कल टेक्नोलॉजी के समय में लोगो का श्रम बहुत ही कम हो गया है और लोग टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भर हो गए है। जिस कारन से आज का समाज शारीर से बहुत ही अलसी और बहुत सारे रोगो से ग्रसित है। शारीरिक श्रम ना होने के कारण लोगो का फैट बडा हुआ है और मोटापा से लोग परेशान है । अगर आप एक बार मोटा हो गए तो आपका शरीर विभिन प्रकार के रोगों का घर बन जाता है ।
आज कल विभिन तरीके से लोग मोटापा को कम करना चाहते है लोग मोटापा weight loss को कम करने के लिए हजारों रुपये खर्च कर देते है फिर भी उनको संतुष्ठ जनक लाभ नहीं मिलता है।
कपालभाती से आप आसानी से अपना weight loss वजन कम कर सकते है और साथ-साथ इस प्राणायाम से बहुत सारे अन्य लाभ भी ले सकते है अगर आप कपालभाती का नित्य अभ्यास करते है तो।
कपालभाती का परिचय - कपालभाती एक संस्कृत शब्द है । कपालभाती का मतलब होता है, कपाल का मतलब मस्तक या सिर और भाती का मतलब चमकने वाला और प्राणायाम का मतलब साँस लेने की प्रक्रिया।
कपालभाती एक शक्ति से परिपूर्ण यानि श्वांस के द्वरा किये जाने वाला प्राणायाम है जो आपका वज़न कम करने में मदद करता है और आपके पूरे शरीर को संतुलित करता है।
किसी भी प्राणायाम को करने से पहले उससे जुड़ी सावधानियों को जान लेना बहुत जरूरी होता है जिससे की आप को कोई हानि न हो सके।
कपालभाती करने से पहले कुछ सावधानियां - अगर आपको बुखार, दस्त, अत्यधिक कमजोरी की स्थिति हो तो इसे कदापि न करें।
इस प्राणायाम को खाने के बाद 5 घंटे तक नहीं करना चाहिए नहीं तो आपको हानि पहुंच सकती है।
अगर आपको पेट के किसी अंग जैसे लीवर, पैंक्रियाज, प्लीहा, छोटी आंत, बड़ी आंत, गुर्दे, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, सूजन और अल्सर आदि शिकायतें हो तो यह प्राणायाम कभी ना करें ।
कपालभाती प्राणायाम धूल-धुआं, दुर्गंध बंद व गर्म वातावरण में कभी नहीं करना चाहिए।
अगर आपको हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और पेट में गैस आदि कि शिकायतें हो तो यह प्राणायाम धीरे-धीरे करना चाहिए 60 बार 1 मिनट में करना चाहिए ।
जल्दी पतला होने के चक्कर में लोग अनेक बार इस प्रणायाम को करते हैं जो बहुत ही हानिकारक है।
अगर आप को कब्ज की शिकायत हो तो यह प्राणायाम न करें, गुनगुने पानी में नींबू डालकर पेट साफ कर ले और फिर प्राणायाम को करें।
कपालभाती प्राणायाम करने की विधि - सबसे पहले एक साफ और खुले स्थान पर चादर को बिछाकर आराम से बैठ जाइए।
आप किसी एक आसन सिद्धासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाइए और शरीर बिल्कुल ढीला होना चाहिए। बैठने के बाद अपने पेट को भी ढीला छोड़ दें।
आपके रीड की हड्डी एकदम सीधी होनी चाहिए और शरीर बिल्कुल ढीला होना चाहिए।
अब अपने नाक से सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते रहे जब जब आप अपनी सांसो को बाहर छोड़े ठीक उसी समय अपने पेट को अंदर की ओर खींचे।
श्वांस अंदर लेने की जरूरत नहीं है, इस क्रिया में श्वांस स्वत: ही अंदर लिया जाता है।
आप लगातार जितने समय तक आराम से कर सकते हैं तब तक नाक से सांस को बाहर छोड़ते रहें और पेट को अंदर कमर तक खींचने की क्रिया को करते रहे ध्यान रहे कि यह क्रिया आराम से की जानी चाहिए और आपका पेट अंदर की तरफ नाभि को केंद्र मानकर जाना चाहिए।
इस प्राणायाम को शुरुआत में 10 से 15 बार और धीरे-धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 75 बार तक इस क्रिया को किया जा सकता है।
आप चाहे तो बीच में कुछ समय तक आराम कर सकते हैं और फिर इस क्रिया को दोबारा कर सकते हैं।
कपालभाती प्राणायाम के फायदे - कपालभाती करने से शरीर और मन के सारे नेगेटिव थॉट्स मिट जाते हैं।
कपालभाति को निरंतर अभ्यास करने से वजन कम करने में सहायता मिलती है और साथ में पेट के आस-पास जमी हुई चर्बी कम होती है पेट की अतिरिक्त बढ़ती हुई चर्बी के लिए यह प्रणाम बहुत ही लाभदायक है।
कपालभाति करने से पसीना बहुत ज्यादा आता है जिस कारण शरीर स्वस्थ रहता है।
यह आपके कमर के आकार को फिर से सामान्य स्थिति में लाने में मदद करता है।
कपालभाती प्रणायाम आपकी याददाश्त को तेज करता है।
चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे का कालापन दूर करने में काफी मदद करता है और चेहरे पर दोबारा चमक लौटाता है।
यह प्रणब गैस और कब्ज की परेशानी को दूर करने में बहुत ही लाभदायक होता है।
यह शरीर को डिटॉक्स करता है।
कपालभाति करने से बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है।
कपालभाति प्राणायाम को करने से रक्त धमनी के कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है
इस प्रणाम को करने से आपकी श्वास नली की सफाई अच्छे से हो जाती है।
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