Wednesday, 20 December 2023

मैं आत्मा, जो हमेशा से है हमेशा रहेगी | I am soul who is always exist and alive

December 20, 2023 0 Comments

सारी जिन्दगी हम इस शरीर के लिएे भागते रहते है जो कि एक दिन अवश्यमेव छोड़ना पड़ेगा । हम यदि अभी भी यह समझ जायें कि हम शरीर नही है, शरीर तो एक दिन छोड़ना होगा । छोड़ेगा कौन ? मैं आत्मा, जो हमेशा से है हमेशा रहेगी। 

यह मनुष्य जीवन मिला ही हमें इसीलिये है कि हम यह समझ सकें कि मैं हूँ कौन ?

हम (आत्मा) 84 लाख योनियों में जिस भी शरीर मे गये उसी शरीर को हमने मैं (मैं यह शरीर हुँ) मान लिया, और उसी के लिएे यह 4 चार काम करने लगा,

१ शरीर का पेट भरना ।
२ सोना ( निद्रा) ।
३ सन्तानोप्ति (Sex)
४ शरीर की रक्षा

इस मानव शरीर को पाकर भी क्या हम यही चार कार्य नहिं कर रहें है क्या यह सोचें ?

हमें यह मनुष्य जीवन मिला है अपनी आत्मा का पेट भरने के लिये क्या मैनें  आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न किया नहि किया तो कब करुँगा, इस मानव तन के रहते रहते ही हम आत्मा का पेट भरने का प्रयत्न कर सकते है, मानव शरीर छिन जाने के बाद नही, फिर पता नही कब यह मानव शरीर  मिले ? 

हिन्दू धर्म के 16 संस्कार में यज्ञोपवीत संस्कार | 16 sacraments of sacred thread in Hindu religion

December 20, 2023 0 Comments

हिन्दू धर्म के 16 संस्कार में यज्ञोपवीत संस्कार

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

प्रजापति ने स्वाभाविक रूप से जनेऊ निर्माण किया है। जनेऊ का धागा कच्चे सूत से बना हुआ होता है। जनेऊ को व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर इस प्रकार पहना जाता है कि दाईं कमर के नीचे तक पहुच जाये। यह आयु, विद्या, यश और बल को बढ़ानेवाला है।

हिंदू धर्म के महत्त्वपूर्ण 16 संस्कारों में एक संस्कार जनेऊ / यज्ञोपवीत संस्कार भी है । भारतीय हिन्दू धर्म में 16 संस्कार निम्नलिखित है।

      गर्भाधान

      पुंसवन

      सीमन्तोन्नयन

      जातकर्म

      नामकरण

      निष्क्रमण

      अन्नप्राशन

      चूड़ाकर्म

      विद्यारम्भ

      कर्णवेध

      यज्ञोपवीत / जनेऊ

      वेदारम्भ

      केशान्त

      समावर्तन

      विवाह

      अन्त्येष्टि

जनेऊ / यज्ञोपवीत संस्कार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्त्वपूर्ण  है।

*जनेऊ के तीन सूत्र के सम्बन्ध में मत्त्वपूर्ण बातें !*

यह तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं।

यह तीन सूत्र सत्व, रजस् और तमस् का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र शरीर में उपस्थित प्राण शक्ति इडा, पिंगला तथा सुषुम्ना नाड़ी का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र गायत्री मंत्र विद्यमान चरणों का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र तीन आश्रमों ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ का प्रतीक है।

यह तीन सूत्र  तीनो काल  भूतकाल, वर्तमानकाल तथा भविष्यतकाल का भी प्रतीक है।

यह काल रक्षक के रूप में भी प्रतिष्ठित है।

यह तीन सूत्र  त्रिदोष कफ, पित्त तथा वात्त को भी नियंत्रित करता है। 

*जनेऊ में उपसूत्र*

जनेऊ में कुल ९ सूत्र और उपसूत्र होते है।  ऊपर तीन सूत्र बताया गया है परन्तु प्रत्येक तीन सूत्रों तीन तीन उपसूत्र होते है इस प्रकार कुल ९ सूत्र और उपसूत्र हो जाते है। इस तरह कुल सूत्रों की संख्या नौ हो जाती है। नौ सूत्रों का संकेत निम्न प्रकार से है –

मुख,     1

नसिका  2

आंख     2 

कान     2

मूत्र द्वार  1

मल द्वार 1  

इस प्रकार सभी मिलकर कुल 9 हो जाते हैं। इसका अर्थ है कि हम मुख से सत्य और प्रिय वचन बोले और खाएं, नेत्रो से सूंदर देंखे और कानों से सुवचन सुने।

*जनेऊ की लंबाई कितनी होती है*

जनेऊ/यज्ञोपवीत की लंबाई भी निश्चित होती है ।जनेऊ बनाते समय लम्बाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि लम्बाई कम है तो वह दोष माना जाता है। जनेऊ की लम्बाई 96 अंगुल होती है। जनेऊ की लम्बाई यह सूचित करता है कि जो भी इसे धारण करें उसे  32 विद्याओं (चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक ) और 64 कलाओं को जानने और सीखने का प्रयास करना चाहिए। 64 कलाओं में जैसे- साहित्य कला, कृषि ज्ञान, वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी,  दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण आदि।

*जनेऊ में कितने गाँठ होते है*

जनेऊ /यज्ञोपवीत में पांच गाँठ लगाई जाती है जो  धर्म, अर्ध, काम, मोक्ष और ब्रह्म का प्रतीक है। यह पांच यज्ञों, ऋषि यज्ञ, देव यज्ञ, बलि वैष्वानर यज्ञ, अतिथि यज्ञ व पितृ यज्ञ नामक पांच यज्ञों का नित्य विधान बताया गया है।  पञ्च ज्ञानेद्रियों (आंख कान नाक त्वचा जिह्वा) और पंच कर्मों का  प्रतीक है।

*जनेऊ धारण करने की आयु*

प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी उस समय प्राय: 8  वर्ष की उम्र में यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हो जाता था। इसके बाद बालक पढने के लिए गुरुकुल चला जाता था। यज्ञोपवीत संस्कार से ही बालक को ब्रह्मचर्य की दीक्षा दी जाती थी जिसका पालन गृहस्थाश्रम में आने से पूर्व तक किया जाता था। इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य अनुशासित जीवन व्यतीत करने से है।

जनेऊ धारण करने का उम्र मुख्यतौर पर बालक के जन्म से ब्राह्मण 8 वें वर्ष में, क्षत्रिय 11 वे, तथा वैश्य 12 वे वर्ष में यज्ञोपवीत धारण  करें। किसी  कारणवश इस काल विशेष में यज्ञोपवीत संस्कार नहीं हो सका तो  ब्राह्मण 16 वें वर्ष में, क्षत्रिय 22 वे, तथा वैश्य 24 वे वर्ष में यज्ञोपवीत संस्कार करा सकते है। ब्राम्हण का वसंत ऋतु में, क्षत्रिय का ग्रीष्म में और वैश्य का उपवीत शरद ऋतु में होना चाहिए।

*वैज्ञानिक दृष्टि में जनेऊ का महत्त्व*

वैज्ञानिक दृष्टि से भी जनेऊ पहनना स्वास्थ्य के दृष्टि से लाभदायक है। यह हमें स्वस्थ्य बनाये रखने में सहायता करता है। 

जनेऊ के हृदय मध्य से गुजरता है अतः यह हृदय रोग से बचाता है।

हमारे कान में एक नस होता है जीका  जिसका सीधा सम्बन्ध मस्तिष्क से होता है जब जनेऊ  के माध्यम  से यह नस दबता है है तो मस्तिष्क की कोई सोई हुई तंद्रा कार्य करने लगती है जो हमें स्मरण शक्ति एवम विवेकशक्ति बढ़ाने में कार्य करती है।

हमारे दाएं कान की नस अंडकोष और गुप्तेन्द्रियों से जुड़ी होती है। मूत्र विसर्जन के समय दाएं कान पर जनेऊ लपेटने से शुक्राणुओं की रक्षा होती है।

मल-मूत्र करने से पहले जनेऊ को  हम कानों पर कस कर दो बार लपेटते हैं जिससे कान के पीछे की नसें, जिनका संबंध पेट की आंतों से होता है,नस के दबने से आंतों पर भी दबाव पड़ता है जिससे मल विसर्जन आसानी से हो जाता है।

कान के पास ही एक ऐसा नस होता है जो मल-मूत्र विसर्जन के समय सक्रिय होता है उससे कुछ द्रव्य निकलता है। जनेऊ उस द्रव्य को रोक देता है, जिससे पेट के रोग,  कब्ज, एसीडीटी,  मूत्रन्द्रीय रोग,  हृदय के रोग, रक्तचाप जैसे अन्य संक्रामक रोग होने से रोकते है।

यह हमें बार-बार आने वाले  बुरे स्वप्नों से भी मुक्ति दिलाती है | कान में जनेऊ लपेटने से मनुष्य में सूर्य नाड़ी जाग्रत हो जाता है जिससे मनुष्य में दिव्यता बनी रहती है।

जनेऊ पाचन संस्थान को ठीक करता है और पेट तथा शरीर के निचले अंगों में विकार नहीं लाने देता है। जनेऊ ‘एक्यूप्रेशर’ के विकल्प के रूप में भी कार्य करता है। जनेऊ हमें लकवा अथवा पक्षाघात बीमारियों से बचाता है। 

Monday, 18 December 2023

आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें। Prana Mudra - How To Do Steps And Its Benefits

December 18, 2023 0 Comments

 आंखों की समस्याओं से परेशान है तो इस मुद्रा को जरूर करें।]


Prana Mudra
Prana Mudra
आजकल आंखों की समस्या होना आम बात हो गई है। आजकल डिजिटल समय में लोग हमेशा मोबाइल, कंप्यूटर पर दिन-रात अपने जरूरी कामों में लगे रहते हैं, जिसके कारण आंखों में समस्या होना आम बात हो गई है। इस पोस्ट में आपको 'प्राण मुद्रा' के अद्भुत गुण के बारे में बताएंगे जिसको करने से आपको अद्भुत लाभकारी फायदे होंगे।


प्राण मुद्रा करने की विधि

प्राण मुद्रा में कनिष्ठा (छोटी अंगुली), अनामिका (तीसरी अंगुली) एवं अंगूठे का अग्रभाग को एक साथ मिलाना पड़ता है और बाकी दोनों अंगुलियों को सीधा रखिए और इस प्रकार आपके हाथो में प्राण मुद्रा का आकार बन जाएगा। 30 सेकंड तक इसी आकार में अपने हांथो की  अंगुलियों को रखे। प्राण मुद्रा 15 से 20 बार करे जिससे आपको काफी लाभ मिलेगा। ऊपर दिए हुए चित्र अनुसार आप अभ्यास कर सकते है।


प्राण मुद्रा के अद्भुत लाभ

इस मुद्रा के नाम से ही समझ सकते है कि ये मुद्रा प्राण दायी है। प्राण के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता। इस मुद्रा को करने से प्राणों की सोई हुई शक्ति वापस लौट आती है । शरीर और मन में अलग से एक सक्रात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। अगर आप आंखो के किसी भी समस्या से परेशान है तो इस मुद्रा को करने से आपको 1 महीना के अंदर आपको फर्क साफ महसूस होने लगेगा। इस मुद्रा को करने से आंखो में अद्भुत रोशनी बढ़ने लगती है और आप किसी भी नंबर का चस्मा क्यों ना पहनते हो, इस मुद्रा से एक महीने के अंदर चस्मा हटाने में मदद करता है। लगातार एक महीने तक इस मुद्रा का अभ्यास करने से आपकी आंखों की रोशनी बढ़ जाती है। लंबे समय तक प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से उपवास में भी भूख नहीं लगती। अनिद्रा रोग में ज्ञान मुद्रा के साथ यह व्यायाम करने पर सुफल लाभ प्राप्त होता है।

दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ | Ten major yoga Mudra and its benefits

December 18, 2023 0 Comments

हम जानते है कि हमारा शरीर पाँच तत्व से मिलकर बना है। अग्नि, वायु, पानी, धरती और ईथर, जिसमे हमारी हांथो की अंगुलियाँ इसका प्रतिक है। मुद्रा योग एक प्रकार का हाथों का योग है जिसमे हम अपने अँगुलियो को आपस में जोड़ने से योग मुद्रा बनती है। जिसको करने से हम शरीर के चुम्बुकिये तरंगे को सक्रिये करते है । 


मुद्रा योग के द्वारा हम अपने शरीर को वात, पित और कफ को संतुलन बनाये रखते है। जब हमारा शरीर असंतुलित हो जाता है तब हमारे शरीर में वात या पित या फिर कफ का असंतुलित मना जाता है | मुद्रा योग से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके कारण हमारा शरीर संतुलन बनाये रखता है। 

इस पोस्ट में हम दस प्रमुख योग मुद्रा और इसके लाभ के बारे में जानेंगे ।

1. शुक्राणुओं की संख्या | Sperm Count

अपने कलाई पर इस बिंदु को मालिश करके अपने शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा दें। | boost your sperm production by massaging this point on your wrist.

2. दमा । Asthma 

सांस लेने में सहायता करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to aid breathing

3. सर्दी । Colds 

साइनस से छुटकारा पाने के लिए बड़े पैर की उंगलियों पर इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point on the big toes to get rid sinuses.

4. माइग्रेन | Migraine

प्रत्येक उंगली की युक्तियों को मालिश करें । Massage the tips of each finger.

5.गठिया | Arthritis

जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस बिंदु को मालिश करें । Massage this points to relieve stiffness from joints.

6. उच्च रक्तचाप | Hypertension

रक्त प्रवाह को आराम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage at this point to relax the blood flow.


7.अनिद्रा | Insomnia

विश्राम को बढ़ावा देने और नींद को प्रेरित करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें। Massage this point to promote relaxation and induce sleep.


8.मासिक धर्म ऐंठन | Menstrual cramps

इस बिंदु को गर्भाशय में आराम करने और मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने के लिए मालिश करें । Massage this point to relax uterus and reduce pain during menstruation.

9. डिप्रेशन | Depression

सेरोटोनिन (खुशी हार्मोन) को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पैर की अंगुली के शीर्ष पर इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point on the top of each toe to promote serotonin(happiness hormones).

10. जी मिचलाना | Nausea

जी मिचलाना के लक्षणों को कम करने के लिए इस बिंदु पर मालिश करें । Massage this point to subside the symptoms of nausea.

भारत की संस्कृति को पहचाने | Recognize India's Culture

December 18, 2023 0 Comments

 *भारत की संस्कृति को पहचाने !*

*ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये.!*
*खासकर अपने बच्चो को बताए क्यों कि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...*

             *⌛दो पक्ष⌛*
१-कृष्ण पक्ष ,    २-शुक्ल पक्ष❗

        *🙏तीन ऋण🙏*
१-देवऋण , २-पितृऋण, ३-ऋषिऋण❗

         *🏉चार युग🏉*
१-सतयुग ,  २-त्रेतायुग ,
३-द्वापरयुग ,  ४-कलियुग❗

        *🌷चार धाम🌷*
१-द्वारिका , २-बद्रीनाथ ,
३-जगन्नाथपुरी , ४-रामेश्वरमधाम❗

       *🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*) 
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗

          *⌛चार वेद⌛*
१-ऋग्वेद , २-अथर्ववेद ,३-यजुर्वेद , ४-सामवेद!

            *🍁चार आश्रम🍁*
१-ब्रह्मचर्य , २-गृहस्थ , ३-वानप्रस्थ , ४-संन्यास❗

           *🏉चार अंतःकरण🏉*
१-मन , २-बुद्धि , ३-चित्त , ४-अहंकार❗

          *🍁पञ्च गव्य🍁*
१-गाय का घी , २-दूध , 
दही ,३-गोमूत्र , ४-गोबर❗

         *🙏पञ्च देव🙏*
१-गणेश , २-विष्णु , ३-शिव , ४-देवी ,५-सूर्य

          *🕹पंच तत्त्व🕹*
१-पृथ्वी ,२-जल , ३-अग्नि(तेज) , ४-वायु , ५-आकाश❗

        *⌛छह (षट्दर्शन) दर्शन⌛*
१-वैशेषिक , २-न्याय ,३-सांख्य , ४-योग , ५-पूर्व मिसांसा , ६-उत्तर मिसांसा❗

       *🌷  सप्त ऋषि🌷*
१-विश्वामित्र ,२-जमदाग्नि ,३-भरद्वाज , ४-गौतम , ५-अत्री , ६-वशिष्ठ और कश्यप❗

          *🍁सप्त पुरी🍁*
१-अयोध्यापुरी ,२-मथुरापुरी ,
३-मायापुरी *(हरिद्वार)*, ४-काशीपुरी ,
५-कांचीपुरी *(शिन कांची-विष्णु कांची),*
६-अवंतिकापुरी और 
७-द्वारिकापुरी❗

          *⌛आठ योग⌛*
१-यम , २-नियम , ३-आसन ,४-प्राणायाम , ५-प्रत्याहार , ६-धारणा , ७-ध्यान, एवं ८-समािध❗

          *🙏आठ लक्ष्मी🙏*
१-आग्घ , २-विद्या , ३-सौभाग्य ,४-अमृत , ५-काम , ६-सत्य , ७-भोग ,एवं ८-योग लक्ष्मी❗

             *🌹नव दुर्गा 🌹*
१-शैल पुत्री , २-ब्रह्मचारिणी ,३-चंद्रघंटा , ४-कुष्मांडा , ५-स्कंदमाता , ६-कात्यायिनी ,७-कालरात्रि, ८-महागौरी एवं ९-सिद्धिदात्री❗

       *🍫 दस दिशाएं🍫*
१,पूर्व , २-पश्चिम , ३-उत्तर , ४-दक्षिण ,५-ईशान , ६-नैऋत्य , ७-वायव्य , ८-अग्नि 
९-आकाश, एवं १०-पाताल,❗

               *🏉मुख्य ११ अवतार🏉*
 १-मत्स्य , २-कश्यप , ३-वराह , ४-नरसिंह , ५-वामन , ६-परशुराम ,७-श्री राम , ८-कृष्ण , -बलराम , १०-बुद्ध एवं ११-कल्कि❗

         *🍁बारह मास🍁*
१-चैत्र , २-वैशाख , ३-ज्येष्ठ ,४-अषाढ , ५-श्रावण , ६-भाद्रपद , ७-अश्विन , ८-कार्तिक ,९-मार्गशीर्ष , १०-पौष , ११-माघ , १२-फागुन❗

       *⌛ बारह राशी ⌛*
१-मेष , २-वृषभ , ३-मिथुन , ४-कर्क , ५-सिंह , ६-कन्या , ७-तुला , ८-वृश्चिक , ८-धनु , १०-मकर , ११-कुंभ , १२-कन्या❗

           *🙏बारह ज्योतिर्लिंग🙏*
१-सोमनाथ ,२-मल्लिकार्जुन ,३-महाकाल , ४-ओमकारेश्वर , ५-बैजनाथ , ६-रामेश्वरम ,७-विश्वनाथ , ८-त्र्यंबकेश्वर , ९-केदारनाथ , १०-घुष्मेश्वर, ११-भीमाशंकर ,१२-नागेश्वर!

       *💥पंद्रह तिथियाँ💥*
१-प्रतिपदा ,२-द्वितीय ,३-तृतीय ,४-चतुर्थी , ५-पंचमी , ६-षष्ठी , ७-सप्तमी , ८-अष्टमी , ९-नवमी ,१०-दशमी , ११-एकादशी , १२-द्वादशी , १३-त्रयोदशी , १४-चतुर्दशी , १५-पूर्णिमा, अमावास्या❗

           *🕹स्मृतियां🕹*
१-मनु , २-विष्णु , ३-अत्री , ४-हारीत ,५-याज्ञवल्क्य ,७-उशना , ७-अंगीरा , ८-यम , ९-आपस्तम्ब , १०-सर्वत ,१०-कात्यायन , १२-ब्रहस्पति , १३-पराशर , १४-व्यास , १५-शांख्य , १६-लिखित , १७-दक्ष , 
१८-शातातप , १९-वशिष्ठ

Sunday, 17 December 2023

पीरियड्स में अपनी देखभाल कैसे करें | Taking Care of Yourself During Period

December 17, 2023 0 Comments

 पीरियड्स हर महिला के जीवन का अहम हिस्सा हैं। इसके बीना औरते परिपूर्ण नहीं रहती। पीरियड्स का सामना हर महीने औरतो को करना पड़ता है। ये कम से कम 3 दिन या ज्यादा - से - ज्यादा 8 दिन तक रहता है। महिलाएं पीरियड्स में काफी चिरचिरा हो जाती हैं। क्योंकि औरतों को पेट के निचले हिस्से, कमर, पैर में दर्द रहता है | किसी को बहुत ज्यादा दर्द होता है तो किसी को थोड़ा कम। कभी - कभी तो कुछ महिलाएं दवा का भी सेवन करने लगती हैं। आपको बता दें कि ज्यादा दवा पीरियड्स में लेने से सेहत को नुक्सान भी पहुंचता है।


सावधानियां ‌:- पीरियड्स में औरतों को अपनी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। वजनदार सामान नहीं उठाना चाहिए। ज्यादा दौराना नहीं चाहिए। ये सब करने से खुन का बहाव ज्यादा मात्रा में होने लगते है। जो कि आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता हैं।

पीरियड्स में होने वाले दर्द का घरेलू उपचार 


घरेलू उपचार पीरियड्स में होने वाले दर्द में आराम देता है वो इस प्रकार हैं   

(1) गर्म पानी को बोतल या बैग में भरें और अपने पेट पर रखे।

(2) उबलते हुए पानी में थोड़ा अदरक, अजवाइन और कुछ तुलसी के पत्ते को मिलाकर अच्छे से उबाल लें और फिर उसे छननी से छान लें और उसमें थोड़ा शहद, थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर हल्का गर्म - गर्म पीए।

(3) पीरियड्स में शरीर से आयरन और विटामिन ज्यादा खर्च होते हैं इसलिए खान - पान का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। नहीं तो अगले पीरियड्स में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तो इस दौरान हरी सब्जियां, फल, दूध आदि का सेवन करें।

(4) मासिक धर्म मे अगर ज्यादा तकलीफ होती है, तो पीरियड्स आने के पहले से ही थोड़ी व्यायाम, योग शुरू कर देना चाहिए ताकि पीरियड्स आने पर दर्द कम हो।

(5) एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीएं। हल्दी शरीर को गर्म बनाती है जिससे पीरियड्स में होने वाले दर्द और परेशानी कम हो जाते हैं

तो इस तरह की देखभाल से आप अपने पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं।

एक दिन में आदमी को पानी पीना कितना जरूरी है । How much is it necessary for a person to drink water in a day.

December 17, 2023 0 Comments

पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। इसलिए तो कहा गया है जल ही जीवन है। जीवन मनुष्य का हो या जीव जंतु का हो या पेड़ पौधे का सभी के लिए पानी जरूरी होता है। हम सभी जानते हैं कि जन्म के समय मनुष्य का शरीर 75% पानी से बना होता है। लेकिन जैसे-जैसे हमारा शरीर बढ़ता है तो पानी का मात्रा कम होता जाता है। 


युवा होने पर एक महिला के शरीर में 55% पानी की मात्रा होती है, तो एक नौजवान पुरुष के शरीर में 60% प्रतिसत। हमारे शरीर में सभी अंगों को सही तरीके से रख-रखाव के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। कोई भी व्यक्ति बिना खाना के कुछ दिन तक रह सकता है पर पानी के बिना नहीं रह सकता। 

पानी के कुछ नियम होते है जिन्हें पालन करने से हमारे शरीर को कोई बीमारी होने का खतरा नहीं रहता है।

पानी का मात्रा -  बताये गए सलाह के अनुसार दिन भर में 2.5 से 3.5 लीटर तक पानी पीना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुछ वर्क आउट करता है तो उसे थोड़ी पानी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। मल, पेशाब, अौर पसीने के कारण हमारे शरीर से प्रतीदिन 2 से 3 लिटर पानी बाहर निकल जाता है। एक-दूसरे से बात-चीत करने पर भी हमारे शरीर का पानी वाष्प बनकर बाहर निकलता है।

ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है तो वहीं जरुरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे किडनियों के लिए हानिकारक भी हो सकती है। आपके शरीर में पानी की मात्रा सही है कि नहीं यह हमें पेशाब से पता चलता है। यदि आपके पेशाब का रंग साफ है तो आपका शरीर हाइड्रेटेड यानि बिलकुल सही है और अगर पेशाब का रंग पीला है तो आपका शरीर डेहाइड्रेटेड है यानि बिल्कुल स्वस्थ है।

पानी कब नहीं पीना चाहिए -
(1) ज्यादातर लोग खाने के साथ- साथ पानी भी पीते हैं जो कि यह बिल्कुल भी नही करना चाहिए। ऐसा करने से खाना पतला हो जाता है और अच्छी तरह से पाचन नहीं हो पाता

(2) पेशाब करने के तुरंत बाद पानी न पिएं। क्योंकि जब हम पेशाब करते है तो हमारे शरीर के अंदरूनी अंग तेजी से सिकुड़ने लगते है और ऐसी स्थिति में तुरंत पानी पीने से नसें और अंदरूनी अंग कमजोर हो जाते हैं।

(3) गर्म चाय या कॉफी पीने के तुरंत बाद पानी न पिएं। ऐसा करने से हमारे टांसिल और गले को नुक्सान पहुंचता है।

(4) रसीले, खट्टे फल खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं। और ऐसा करते है तो आपको ठंड लग सकता है या पेट खराब हो सकती है।

पानी पीने का समय -  सुबह मल या पेशाब करने के पहले एक गिलास पानी जरूर पिएं क्योंकि सुबह के समय बनने वाली लार में हमारे शरीर के लिए आवश्यक सभी तरह के एंजाइम्स होते हैं जो कि खाली पेट पानी पीने से यह हमारे शरीर में चले जाते हैं और हमारे सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। खाना खाने के 40 मिनट पहले, और खाना खाने के 40 मिनट बाद ही पानी पिएं। अगर खाने के तुरंत बाद प्यास लगती है, तो जुस पी लेना चाहिए।

पानी कैसे पियें- पानी हमेशा धिरे-धिरे और बैठकर पीना चाहिए। धिरे-धिरे पानी पीने से मुंह का लार हमारे शरीर में जाता है और पानी को पचाता है। हमारा शरीर एक बार में 200 से 250ml तक ही पानी पचाता है। जल्दी-जल्दी पानी पीने से हम ज्यादा पानी पी लेते हैं और वह हमारे शरीर में नहीं लगता और यह पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है।

खरे होकर पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसा करने से हमारे शरीर के अंदर पानी के साथ-साथ हवा भी चला जता है जिससे शरीर के अंदर खिंचाव और दबाव होता है इसलिए हमेशा बैठकर और धिरे-धिरे और किसी पात्र में मुंह लगाकर पानी पिएं। इससे हमारा PH लेवल कंट्रोल में रहता है। मुंह की लार पेट में जाती है और पाचन अच्छा रहता है। पेट की एसीड को शांत रखता है और पेट में चर्बी नहीं होने देता है।