गोरक्षासन करने की विधि और इससे लाभ। Gorakshasana, Gorakshasana steps and benefits
MANISH A
December 26, 2023
0 Comments
गोरक्षासन - गोरक्षासन को गोरखासन भी कहते हैं। महागुरु गोरक्षनाथ (गोरखनाथ) इसी आसन में साधना करते थे।
गोरक्षासन करने की प्रायोगिक विधि - कंबल या दरी बिछाकर नीचे बैठ जाइए, दोनों टांगों को घुटनों से मोड़कर दोनों पैरों के तलवों को एड़ियों से पंजो तक आपस में चिपका लीजिए। दोनों एड़ियों को धीरे-धीरे मूलाधार से सटा लीजिए। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर पैरों के पंजों को पकड़िए। इसमें हाथों के अंगूठे दोनों पैरों के अंगूठे के ऊपर होने चाहिए। सांस को खींचिए और कमर को सीधी रखकर घुटनों को भूमि से सटाइए। जितनी देर सांस रोक सके, रोकें। फिर सांस छोड़कर धीरे-धीरे आसन खोलिए।
आरंभ में घुटनों को भूमि से सटाने के लिए दोनों घुटनों को हाथों से दबाव दिया जाता है और पंजों को पकड़ने की मुद्रा बाद में की जाती है। अभ्यास होने पर घुटने आसानी से भूमि से लग जाते हैं।
गोरक्षासन में ध्यान - यह शक्ति सिद्धि का आसन है। इस आसन में ध्यान लगाने से सम्मोहन-क्षमता, काम-क्षमता एवं शरीर की गुप्त अलौकिक शक्तियों का विकास होता है।
गोरक्षासन से लाभ - गोरक्षासन के अभ्यास से शुक्र ग्रंथियों का व्यायाम होता है। इससे पुरुषों के शुक्राणुओं की क्षमता बढ़ती है। वीर्य वृद्धि एवं वीर्य के गाढ़ेपन में लाभ मिलता है। यह आसन स्वप्नदोष एवं शीघ्रपतन के दोष से मुक्त करता है। मूत्र संबंधी दोष एवं आंत और पेट से संबंधित रोग (बदहजमी, कब्ज, गैस आदि) दूर होते हैं। कंधे पुष्ट होते हैं।बाजुओं की आकृति और बनावट देखते बनती है। पैरों की नसें और पेशियां मजबूत एवं लचीली होती हैं।
महिलाओं को उपर्युक्त शारीरिक लाभ तो होता ही है, मासिक धर्म, रज एवं गर्भाशय के दोष भी दूर होते हैं। जंघाओं एव वक्षों की सुडौलता बनती है। बाजू मजबूत होते है। कमर दर्द और ल्यूकोरिया में भी इससे लाभ होता है।
गोरक्षासन करने से पहले सावधानियां - उत्तर दिशा की ओर मुंह करके या आसन ना लगाएं। घुटनों को भूमि से सटाने में जोर न लगाएं। धीरे-धीरे अभ्यास करने से इस आसन पर काबू पाया जा सकता है।